देशभर में आज करवाचौथ का त्योहार मनाया जा रहा है। सुहागिनों द्वारा सालभर करवाचौथ के व्रत का बड़ी बेसब्री से इंतजार किया जाता है। यह व्रत हर विवाहित महिला के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। व्रत की शुरुआत सुबह सरगी खाकर होती है। जिसके बाद महिलाएं रात में चांद देख व्रत खोलती हैं।

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब चांद निकलने का समय आता है तो तब महिलाओं का इंतजार बढ़ जाता है क्योंकि चांद अपनी सामान्य गति से थोड़ा देर से निकलता है, जिससे महिलाओं का इंतजार बढ़ जाता है। इस देरी के पीछे कोई भावनात्मक कारण नहीं, बल्कि शुद्ध वैज्ञानिक कारण छिपा है।



असल में चंद्रमा के उदय होने का समय Astronomical Mechanics नामक विज्ञान द्वारा तय होता है। यह विज्ञान अंतरिक्ष में ग्रह, चांद और सूरज की गति को समझाता है। चंद्रमा हर दिन आसमान में पूर्व दिशा की ओर बढ़ता है। वह पृथ्वी की परिक्रमा भी पूर्व दिशा में करता है। इस कारण हर रात चंद्रमा को अपनी पिछली जगह से थोड़ा आगे निकलना पड़ता है ताकि वह दोबारा क्षितिज पर दिखाई दे सके।



वैज्ञानिक गणना के अनुसार चंद्रमा हर दिन औसतन लगभग 50 मिनट देरी से उदय होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में प्रतिदिन लगभग 13 डिग्री आगे बढ़ जाता है। पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमकर उस 13 डिग्री की अतिरिक्त दूरी को कवर करना पड़ता है, ताकि चंद्रमा फिर से दिखाई दे सके। यह अतिरिक्त समय लगभग 50 मिनट का होता है।








































































































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