मध्य प्रदेश के दमोह जिले के हटा थाना अंतर्गत बिजौरी पाठक गांव की एक गली में शादी की एक रस्म चल रही थी. दूल्हा गोलू अहिरवार घोड़ी पर बैठे थे, जिनके आगे बैंड बज रहा था और पीछे परिवार और रिश्तेदार ख़ुशी से नाच रहे थे. लेकिन कुछ युवकों ने दूल्हे का रास्ता रोक लिया. पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान गोलू और उनके परिवार के साथ हिंसा की गई.

गोलू अहिरवार ने बताया, “हमारे साथ गांव में वैसे भी भेदभाव होता ही है. उस दिन ज़्यादा हो गया. क्योंकि मैं दलित होकर भी घोड़े पर चढ़ा इसलिए गांव के उच्च जाति के लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने हमारे साथ मारपीट की. वह कह रहे थे कि तुम्हारी जाति के लोग घोड़े पर नहीं बैठ सकते.”


पुलिस के अनुसार चार अभियुक्तों में से तीन एक ही परिवार के हैं और चौथे एक अन्य ग्रामीण हैं. चारों लोग लोधी समुदाय से आते हैं. मारपीट करने का आरोप लोधी जाति के लोगों पर लगा है.



लोधी समुदाय मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी में आता है, और राज्य में ओबीसी आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण कई इलाकों में इस समुदाय का प्रभाव भी है.


एक अभियुक्त की गिरफ़्तारी कर ली गई थी और पुलिस का दावा है कि बाकी को जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा. अभियुक्तों के परिवार ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि ज़मीन के पुराने विवाद के कारण उन लोगों को फंसाया गया है.


















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