पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से पकने वाले देसी आम पूरी तरह बाजार में नहीं पहुंचे हैं. मांग को देखते हुए विभिन्न राज्यों से आम मंगाकर बेचे जा रहे हैं. फल कारोबारियों के अनुसार लंगड़ा और दशहरी जैसी किस्मों की बिक्री अधिक हो रही है, जबकि आने वाले दिनों में मालदह, जर्दालू और चौसा जैसे आम भी बाजार में पहुंचेंगे.

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक लाभ कमाने के लिए कुछ कारोबारी आमों को कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों से कृत्रिम रूप से पका रहे हैं. इस रसायन से निकलने वाली एसिटिलीन गैस आमों को जल्दी पीला और पका हुआ दिखा देती है, लेकिन फल अंदर से पूरी तरह तैयार नहीं होते.



स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक केमिकल से पकाए गए आमों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, सिरदर्द, चक्कर, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लगातार ऐसे फलों का सेवन करने से लिवर और किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है.


ऐसे पहचानें प्राकृतिक और केमिकल वाले आम
जानकारों के अनुसार प्राकृतिक रूप से पके आमों में हल्की मीठी खुशबू होती है और उनका रंग एक समान नहीं होता. वहीं कृत्रिम रूप से पकाए गए आम अक्सर चमकीले पीले दिखाई देते हैं तथा कई बार बाहर से पके और अंदर से कच्चे रहते हैं.


आम को पानी से भरी बाल्टी में डालकर भी उसकी जांच की जा सकती है. सामान्य रूप से पका आम प्रायः डूब जाता है, जबकि कृत्रिम रूप से पकाया गया आम तैर सकता है.








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