सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए संचालित जननी बाल सुरक्षा योजना तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. अस्पतालों से डिस्चार्ज होने के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी अनेक प्रसूताओं को मिलने वाली सरकारी प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में नहीं पहुंच सकी है.

इस राशि के भुगतान के लिए लाचार महिलाएं और उनके परिजन लगातार सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगाने को विवश हैं. योजना के तहत भुगतान में हो रही इस भारी देरी की मुख्य वजह डिस्चार्ज प्रक्रिया के दौरान होने वाली गंभीर त्रुटियां हैं.


प्रसूताओं की जरूरी जानकारियां पोर्टल या सरकारी रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं होने के कारण तकनीकी स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. इसके अलावा कई योग्य लाभुकों के पास आवश्यक जननी सुरक्षा कार्ड उपलब्ध नहीं होने की वजह से भी उनकी प्रोत्साहन राशि को रोक दिया गया है.



स्वास्थ्य विभाग ने प्रोत्साहन राशि के वितरण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की थी. इसके तहत प्रसव के 48 घंटे के भीतर लाभुक के बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से राशि सीधे हस्तांतरित किए जाने का कड़ा प्रावधान किया गया था.


योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य प्रबंधकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, ताकि तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं से बचा जा सके, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है.
















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