उत्तर प्रदेश में दहेज उत्पीड़न के मामलों को लेकर एक बहुत बड़ा कानूनी बदलाव हुआ है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने प्रदेश भर के थानों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है।

अब यूपी में दहेज उत्पीड़न के मामलों में सीधे तौर पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। डीजीपी के नए आदेश के अनुसार, ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले आरोपों की प्रारंभिक जांच करना अनिवार्य होगा।

यह कदम दहेज विरोधी कानूनों के दुरुपयोग को रोकने और पारिवारिक सुलह की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से उठाया गया है।



डीजीपी मुख्यालय द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि दहेज उत्पीड़न से संबंधित 31 विशिष्ट धाराओं के तहत अब शिकायत मिलते ही तुरंत मुकदमा दर्ज नहीं होगा।


























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