राजस्व महाअभियान के दौरान अब राजस्व कर्मचारी क्षतिग्रस्त या ऑनलाइन दर्ज नहीं हुई जमाबंदी वाले रैयतों के आवेदनों को लौटा नहीं सकेंगे. ऐसा करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. राज्य भर से मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह सख्त आदेश जारी किया है.

अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा है कि कई मामलों में जमाबंदी पंजी फटी होने या ऑनलाइन अपलोड न होने की वजह से आवेदकों को वापस लौटाया जा रहा है. रैयतों को यह कहकर परेशान किया जा रहा है कि उनकी जमीन गैर-मजरूआ या बकास्त मालिक है या उन्हें समाहर्ता से नया आदेश लाने को कहा जा रहा है. यह गलत है.



नये आदेश के अनुसार, राजस्व कर्मचारियों को सभी तरह के आवेदन स्वीकार करने होंगे, चाहे वह ऑनलाइन जमाबंदी में सुधार, छूटी हुई जमाबंदी को दर्ज कराने, या नामांतरण (उत्तराधिकार या बंटवारा) के लिए हो.



अपर मुख्य सचिव ने साफ किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों की समस्याओं का समाधान करना है, न कि उन्हें परेशान करना. यदि कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तो कर्मचारी आवेदक को स्पष्ट जानकारी देंगे.




यह कदम रैयतों के लिए बड़ी राहत साबित होगा, जिन्हें पहले अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था.

















































































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