बिहार कैडर के चर्चित और विवादित IAS अधिकारी संजीव हंस एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों के चक्रव्यूह में फंस गए हैं। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल की हवा खा चुके संजीव हंस के खिलाफ अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार का नया मोर्चा खोल दिया है।

ताजा मामला मुंबई के एक बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले ₹1 करोड़ की रिश्वत लेने से जुड़ा है। CBI द्वारा दर्ज की गई नई FIR उस समय की है, जब संजीव हंस तत्कालीन केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री दिवंगत राम विलास पासवान के निजी सचिव के रूप में तैनात थे।



जांच एजेंसी के अनुसार, मुंबई स्थित ‘ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स’ को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से राहत दिलाने के लिए ₹1 करोड़ का सौदा हुआ था। रिश्वत की रकम सीधे लेने के बजाय विपुल बंसल नामक बिचौलिए और ‘हवाला’ नेटवर्क का सहारा लिया गया।



लेनदेन के लिए बाकायदा खास कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया था। संजीव हंस ने कथित तौर पर बिल्डर के पक्ष में सुनवाई की तारीखें बदलवाईं और कंपनी के डायरेक्टर की गिरफ्तारी रोकने में मदद की।






















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