बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर दहेज प्रथा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बेतिया के योगापट्टी थाना क्षेत्र के मच्छरगांवा बाजार गांव में शादी की सारी तैयारियां पूरी होने के बाद भी दूल्हा पक्ष बारात लेकर नहीं पहुंचा. बताया जा रहा है कि महज 50 हजार रुपये की अतिरिक्त मांग पूरी नहीं होने पर शादी तोड़ दी गई.
शादी की तारीख तय थी, घर में खुशियों का माहौल था और परिवार बेटी की विदाई की तैयारी में जुटा था. रिश्तेदारों और मेहमानों से घर भरा हुआ था. बारातियों के स्वागत के लिए खाने-पीने की पूरी व्यवस्था कर ली गई थी. यहां तक कि बकरे के मीट से लेकर हर जरूरी इंतजाम कर लिया गया था, लेकिन दूल्हा पक्ष की एक मांग ने पूरे माहौल को मातम में बदल दिया.

पीड़ित परिवार के अनुसार, मच्छरगांवा बाजार गांव निवासी शबनम की शादी 15 जून को तय हुई थी. शादी को लेकर दोनों परिवारों के बीच पहले से बातचीत चल रही थी. तिलक के समय दूल्हा पक्ष को नकद राशि, बाइक और अन्य सामान भी दिया गया था.
परिजनों का आरोप है कि शादी वाले दिन अचानक दूल्हे के पिता की ओर से 50 हजार रुपये अतिरिक्त देने की मांग कर दी गई. लड़की पक्ष ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इतनी जल्दी रकम देने में असमर्थता जताई. इसके बाद दूल्हा पक्ष ने नाराज होकर बारात लाने से इनकार कर दिया.

बताया जा रहा है कि परिवार ने करीब 200 बारातियों के आने की उम्मीद में बड़ी तैयारी की थी. घर को सजाया गया था और रिश्तेदार दूर-दूर से शादी में शामिल होने पहुंचे थे. सभी लोग बारात आने का इंतजार करते रहे, लेकिन देर रात तक दूल्हा और बाराती नहीं पहुंचे.
घटना की जानकारी मिलने के बाद योगापट्टी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. युवती के परिवार वालों ने दूल्हा पक्ष पर दहेज मांगने और शादी तोड़ने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है. पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और मामले की सच्चाई सामने लाने में जुटी हुई है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.











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