बिहार विधानसभा के एक विशेष सत्र में शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भारी बहुमत के साथ विश्वास मत सफलतापूर्वक हासिल कर लिया. 243 सदस्यों वाली विधानसभा में सरकार को अपना बहुमत साबित करने के लिए 122 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन एनडीए ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए 201 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया.

सरकार ने यह फ्लोर टेस्ट ध्वनिमत के साथ पास कर लिया. जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने नई सरकार को बधाई दी. विश्वास मत पर चर्चा के दौरान सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में एनडीए पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से सत्ता में है.


एनडीए सरकार ने किसानों और महिलाओं के कल्याण को प्राथमिकता दी है और सुशासन स्थापित करने के लिए व्यापक रूप से काम किया है. हमारे नेता नीतीश कुमार एक समृद्ध बिहार की परिकल्पना करते हैं. जिस तरह उन्होंने 3सी (क्राइम, करप्शन, कमुनिलिज़्म) के मामले में कभी कोई समझौता नहीं किया, उसी तरह यह सरकार भी कोई समझौता नहीं करेगी.



विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, बीजेपी ने नीतीश कुमार को खत्म कर दिया है. अगर बीजेपी ने पहले ही यह तय कर लिया होता कि मुख्यमंत्री उन्हीं में से कोई एक होगा, तो आज इस सत्र की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती. किसी भी सरकार को विकास कार्य करने के लिए स्थिरता की आवश्यकता होती है. हालांकि, बिहार एक अनोखा राज्य है. यहां महज पांच वर्षों के अंतराल में ही पांच सरकारें बन चुकी हैं. आखिर, बार-बार ऐसा क्यों होता है.


बतौर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहली बार विधानसभा पहुंचे थे. विधानसभा के पोर्टिको में एनडीए विधायकों ने फूलों के गुलदस्ते भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया. आत्मविश्वास से लबरेज मुख्यमंत्री ने सभी का अभिवादन करते हुए हाथ हिलाया और विक्ट्री साइन दिखाते हुए सदन में प्रवेश किया. इस दौरान भाजपा, जदयू, लोजपा (आर), रालोमो और हम के विधायकों ने जमकर नारेबाजी की.















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