दरभंगा. नवविवाहित के घर का नजारा आज बदला हुआ था. सुबह से ही वातावरण उत्सवी नजर आ रहा था. नवविवाहित की मां बेटे के कोजागरा को लेकर व्यस्त दिख रही थी.

शाम ढलते ही चुमाओन करने की तैयारी में जुट गई थी. बेटे के ससुराल से आये भार को दिखाने में लगी रही. चुमाओन के लिए आंगन में पिठार से अरिपन दिया. सिंदूर का लेप लगाया. उस पर रंगा हुआ पीढ़िया डाला. सामने चुमाओन का डाला रखा.



इसके बाद शाम ढलते ही नवविवाहित को पीढ़िया पर बैठा उसका चुमाओन किया. पारंपरिक वेश धोती, कुर्ता, पाग, दोपटा आदि धारण किये नवविवाहित दूल्हे की तरह नजर आ रहे थे. पारंपरिक गीतों के बीच महिलाओं ने चुमाओन किया.



चुमाओन संपन्न होते ही लड़के की मां ने आंगन में मखान लुटाया और उधर दरवाजे पर मखान के साथ पान, बताशा आदि का वितरण शुरू हो गया.


आधी रात बाद तक हकार पूरने के लिए लोगों की कतार आयोजक परिवार के दरवाजे पर लगी रही. गलियां गुलजार रही.



































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