बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने तीन चौथाई से भी बड़े बहुमत के साथ राज्य के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व तथा अप्रत्याशित जीत दर्ज की है और विपक्षी महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया है।

बिहार में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी जनसुराज का खाता भी नहीं खुल पाया है। राज्य के मतदाताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध और‘वोट चोरी’के विपक्ष के आरोपों को नकारने के साथ-साथ महागठबंधन के प्रत्येक परिवार को एक सरकारी नौकरी देने के लुभावने वादे भी नजरंदाज किया।

बिहार की जनता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जोड़ी के नेतृत्व पर पुन: भरोसा जताया है और उनके सुशासन और विकास के वादों को तरजीह दी है। माना जा रहा है कि चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को दस-दस हजार रुपये की राशि की योजना ने राजग को अप्रत्याशित जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में राजग के करीब 20 वर्ष के लंबे शासन के बावजूद मतदाताओं में सत्ता विरोधी लहर नहीं थी और नीतीश सरकार के चुनाव लड़ रहे ज्यादातर मंत्री अच्छे अंतर से जीते हैं।









































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