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बिहार: करीब 10 जिलों में फिर बढ़ रहा बाल विवाह का ट्रेंड,

भागलपुर, बांका, पूर्णिया, सहरसा, अररिया, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, पूर्वी चंपारण व दरभंगा में 18 की उम्र से पहले बेटियों की शादी कर देने का चलन बढ़ता जा रहा है। इस वजह से इन जिलों में कम उम्र में ही लड़कियां मां भी बन जा रही हैं।देश में बाल विवाह की दर 3.5 प्रतिशत गिरकर 26.8 से 23.3 पर आ गई है। कई राज्यों में भी सुधार हुआ है। झारखंड में 2016 में जहां 37.9 प्रतिशत बेटियां कम उम्र में ब्याही जा रही थीं, वहीं 2020 में 32.2 प्रतिशत बेटियों का ही बाल विवाह हुआ। उत्तरप्रदेश में 2015-16 में 21.8 प्रतिशत के मुकाबले साल 2019-20 में मात्र 15.8 बेटियों की शादी 18 से कम उम्र में हुई। उत्तराखंड में बाल विवाह की दर एनएफएचएस-4 में 13.8 प्रतिशत थी जो एनएफएचएस-5 में 9.8 प्रतिशत हो गई। सबसे चिंतनीय स्थिति त्रिपुरा की है। यहां बाल विवाह की दर 33.1 से बढ़कर 40.1 हो गई। सबसे अच्छी स्थिति राजस्थान की रही, जहां बाल विवाह में 10 प्रतिशत तक कमी आई हैं।नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-4 यानी साल 2015-16 में जहां बिहार की 42.5 प्रतिशत बेटियों की शादी 18 साल से कम उम्र में होती थी, वहीं एनएफएचएस-5 यानी साल 2019-20 में बिहार की बेटियों की नाबालिग उम्र में शादी करने का प्रतिशत घटकर 40.8 पर आ गया। साल 2015-16 में हुए सर्वे के दौरान 15 से 19 साल की 12.2 प्रतिशत महिलाएं गर्भवती मिली थीं। वहीं साल 2019-20 में हुए सर्वे के दौरान इस उम्र की 11 महिलाएं गर्भवती पाई गई हैं।इन दोनों मामलों में भागलपुर में ट्रेंड राज्य के रूझान के विपरीत पाया गया हैं। भागलपुर में चार साल में ही बेटियों की कम उम्र में शादी के ट्रेंड में करीब डेढ़ गुने की बढ़ोत्तरी हुई हैं। डॉ. ज्योति ने इस मामले पर कहा हैं कि कम उम्र में मां बनने वाली महिलाओं को कई सारी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता हैं। साथ ही,जच्चा के साथ-साथ बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है। एनएफएचएस -4 में 29.7बेटियों की शादी कम उम्र में हुई हैं।  एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा बढ़कर 42.4 पर पहुंच गया हैं।

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