उत्तर बिहार के सबसे बड़े मुजफ्फरपुर रेलवे जंक्शन पर शाही लीची की बुकिंग और लोडिंग के खेल में एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है. समस्तीपुर रेल मंडल के सीनियर अधिकारियों ने जंक्शन के पार्सल विभाग में चल रही मनमानी और व्यापारियों के उत्पीड़न को गंभीरता से लेते हुए चीफ पार्सल सुपरवाइजर भरत प्रसाद को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है.

समस्तीपुर रेल मंडल के डीसीएम (मंडल वाणिज्य प्रबंधक) द्वारा अचानक की गई इस बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक से मुजफ्फरपुर जंक्शन समेत पूरे रेल महकमे और पार्सल ठेकेदारों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है.


समस्तीपुर रेल मंडल के डीसीएम राजेश कुमार सिन्हा आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर मुजफ्फरपुर जंक्शन पर यात्रियों की भारी भीड़ और ‘क्राउड मैनेजमेंट’ (भीड़ नियंत्रण) की व्यवस्थाओं का औचक जायजा लेने पहुंचे थे. डीसीएम जंक्शन पर मुस्तैद थे, इसी बीच एक स्थानीय लीची व्यापारी हिम्मत जुटाकर उनके पास पहुंचा और पार्सल विभाग में चल रहे कथित खेल और भेदभाव की लिखित व मौखिक शिकायत दर्ज कराई.



लीची व्यापारी ने डीसीएम राजेश कुमार सिन्हा के सामने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उसकी लीची की खेप समय से बहुत पहले बुक हो चुकी थी और वह लोडिंग के लिए पार्सल यार्ड में रखी थी. इसके बावजूद चीफ पार्सल सुपरवाइजर और अन्य रेल कर्मियों की मिलीभगत से उसकी लीची को लोड नहीं किया जा रहा था.


हैरान करने वाली बात यह थी कि जिन रसूखदार व्यापारियों ने उसके काफी बाद में लीची की बुकिंग कराई थी, नियमों को ताक पर रखकर उनकी लीची को प्राथमिकता देते हुए मुंबई जाने वाली ‘पवन एक्सप्रेस’ के पार्सल वैन (VPH) में लोड कर रवाना कर दिया गया. व्यापारी ने आरोप लगाया कि पार्सल विभाग में ‘सुविधा शुल्क’ और साठगांठ के आधार पर गाड़ियों में जगह (स्पेस) अलॉट की जा रही है.


















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