बिहार राज्य के समस्तीपुर जिले में खरीफ फसलों की खेती में किसान जुट गये हैं. खरीफ की प्रमुख फसल धान की खेती बारिश नहीं होने के कारण प्रभावित हो रही है. किसानों को बारिश का इंतजार है. किसान खरीफ के लिये अपना खेत तैयार कर रहे हैं. वहीं विभाग भी किसानों को अनुदानित दर पर बीज मुहैया करा रहा है. उर्वरक की भी उपलब्धतता सुनिश्चित की गयी है. इधर किसान धान का बिचड़ा गिराकर बारिश का इंतजार कर रहे हैं. वहीं कुछ किसान पटवन कर धान की बोआई कर रहे हैं. किसानों को बारिश की आस है.

किसानों के बीच मौसम को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. हालांकि आज जिले के कुछ हिस्सों में बारिश हुई है. लेकिन हल्की से मध्यम बारिश होने के कारण यह धान की बोआई के लिये उपयुक्त नहीं हैं. किसानों का कहना है कि बारिश नहीं होने की स्थिति में धान की खेती कर पाना मुश्किल है. महंगी सिंचाई से धान की खेती घाटे का सौदा है.



डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी है कि जो किसान धान का बिचड़ा अबतक नहीं गिराये हैं, वे किसान धान का बिचड़ा अब तक नहीं गिराये हों, नर्सरी गिराने का कार्य 10 जुलाई तक सम्पन्न कर लें. धान की अगात किस्में राजेंद्र नीलम, सरस्वती, शभागी, राजेन्द्र स्वेता तथा प्रभात उत्तर बिहार के लिये अनुशंसित है. एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई के लिये 800 से1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिराये.



इधर जिला कृषि विभाग के द्वारा किसानों को अनुदानित दर पर धान सहित विभिन्न खरीफ फसलों की बीज उपलब्ध कराया जा रहा है. जिले में खरीफ का बीज वितरण चल रहा है.विभिन्न फसलों के 15089.2 क्विंटल बीज अनुदानित दर वितरण का लक्ष्य है. इसमें प्रमाणित धान का बीज 531 क्विंटल, संकर धान का बीज 600 क्विंटल, संकर धान का बीज 500 क्विंटल, अरहर बीज 360 क्विंंटल वितरण का लक्ष्य है.




खरीफ 2025 में उर्वरक की आवश्यकता व उपलब्धता
उर्वरक – आवश्यकता – उपलब्धता (मेट्रिक टन में)
यूरिया – 30500 – 13816.760
डीएपी – 7500 – 2538
एनपीके – 6000 – 4223
एमओपी – 1500 – 1995
एसएसपी – 1000 – 647.550































Be First to Comment