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इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए संविधान का गला घोंटा

भारतीय जनता पार्टी भोजपुर द्वारा आरा रेडक्राॅस भवन सभागार में जिलाध्यक्ष दुर्गा राज की अध्यक्षता में देश में कांग्रेस सरकार द्वारा आपातकाल लगाने के 50 वर्ष पूर्ण होने पर संविधान हत्या दिवस के अवसर पर सेमिनार का आयोजन किया गया. मुख्य वक्ता आरा विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आपातकाल के समय की घटना पर आपबीती को बताया.

उन्होंने कहा कि 25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा अपनी कुर्सी बचाने के लिए संविधान का गला घोंट दिया गया और मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध लगा दिया गया. वहीं, भाजपा नेता पूर्व विधायक संजय टाइगर ने कहा कि आज देश भर में उन्हीं लोगों द्वारा संविधान खतरे में है का हायतौबा मचाया जा रहा है, जिन्होने संविधान की हत्या की. आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जो डाॅ भीमराव आंबेडकर को भारतरत्न के साथ उनके जीवन को पंचतीर्थ बना कर सम्मान दिया और देश के सभी वर्गों को उनका अधिकार दे रही है. जब तक भारतीय जनता पार्टी रहेगी, तब तक संविधान का कोई हनन और मौलिक अधिकार प्रतिबंधित नहीं हो सकता.

भाजपा नेता कौशल विद्यार्थी ने कहा कि देश में तीन बार आपातकाल लगा था, लेकिन पहले के दो आपातकाल बाह्य आक्रमण के कारण लगा था, लेकिन इंदिरा गांधी ने आपातकाल केवल अपने प्रधानमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए लगाया. पूर्व प्रशासनिक पदाधिकारी और भाजपा नेता उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आपातकाल की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया, जिसमे इंदिरा गांधी को अयोग्य घोषित कर दिया गया. उन्होंने नागरिकों के सभी अधिकार को छीन लिया.

वक्ताओं ने कहा कि बिहार से जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में छात्र आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया और केंद्र में पहली बार गैर कांग्रेस की सरकार बनी. आज आंदोलन के बहुत सिपाही कांग्रेस की गोद में बैठ कर देश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन एनडीए सरकार उनके मनसूबों को पूरा नहीं होने दे रही. सेमिनार का संचालन जिला उपाध्यक्ष इ धीरेंद्र सिंह और धन्यवाद ज्ञापन जिलाध्यक्ष दुर्गा राज ने किया.

सेमिनार में तारकेश्वर ठाकुर, सियाराम सिंह, डाॅ विजय गुप्ता, हरेंद्र पांडेय, प्रहलाद राय, संतोष चंद्रवंशी, ममता सिंह, राजकुमार कुशवाहा, ज्योति कुशवाहा, निशांत, जीतु चौरसिया, चुन्नी देवी, लव पांडेय, राकेश उपाध्याय, संजय कुमार सिंह, संतोष पांडेय, हैप्पी तिवारी, अशोक सिंह, राविन कुशवाहा, मनीष गुप्ता, विभु जैन, पंकज, सीता देवी, विणा गुप्ता आदि सैकड़ों कार्यकर्ता और लोग शामिल थे.

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