महंगाई के इस युग में अगर कोई व्यक्ति 10 रुपये में भरपेट भोजन कर लें तो यह किसी आश्चर्य से कम नहीं. एक व्यक्ति अगर झोंपड़ीनुमा होटल में भी एक टाइम का भोजन करता है, तो उसे 40 से 50 रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे. पोरसन यानी अतिरिक्त सामग्री लेने पर उसे अलग से पैसे देने पड़ेंगे.

औरंगाबाद शहर के बहुत से गरीब परिवार के लोग सिर्फ 10 रुपये में एक समय के भोजन का आनंद उठा रहे है. भोजन भी ऐसा कि उसे कोई भी व्यक्ति ग्रहण करे. बिल्कुल स्वच्छ व सुपाच्य. बड़ी बात यह है कि महीने में दो से तीन दिन ऐसा होता है, जब भोजन करने वाले लोगों को पैसे भी नहीं देने पड़ते है. हालांकि, भोजन कराने या करने का समय भी निर्धारित है.



धरनीधर मोड़ के समीप हर दिन रात साढ़े आठ बजे से भोजन परोसने का सिलसिला शुरू होता है. इस कार्य में शहर के कई जाने-माने व्यवसायी हाथ बंटाते है. 10 रुपये के भोजन के पीछे 13 दोस्तों के एक प्रयास की कहानी है. 22 जुलाई को इस नेक काम के संचालन को एक साल पूरे हो गये. मंगलवार की रात तमाम दोस्तों के साथ-साथ शहर के समाजसेवियों व बुद्धिजीवियों ने इसे सेलीब्रेट किया. हर दिन भोजन ग्रहण करने वाले लोगों को नि:शुल्क में भोजन कराया और उन्हें अंग वस्त्र के साथ सम्मानित भी किया गया. बड़ी बात यह है कि 13 दोस्तों के नेक कार्य की चर्चा पूरे जिले में हो रही है.



औरंगाबाद जैसे शहर में 10 रुपये में भरपेट भोजन कराना बड़ी बात है. पिछले एक साल से सिलसिला जारी है. 22 जुलाई 2024 से इसकी शुरूआत हुई थी. युवा समाजसेवी व व्यवसायी पंकज वर्मा ने बताया कि औरंगाबाद शहर में हर दिन विभिन्न प्रखंडों व इलाकों से सैकड़ों मजदूर मजदूरी करने आते है. बहुत से मजदूरों को काम नहीं मिलता है, तो थक हारकर धर्मशाला या किसी अन्य परिसर में रात गुजारने को मजबूर हो जाते है. ऐसे में उन्हें भोजन की चिंता सताते रहती है.




बहुत से गरीब परिवार हैं, जो एक समय किसी तरह भोजन ग्रहण कर लेते है, लेकिन दूसरे समय का ठिकाना नहीं होता है. ऐसे में उनके 12 साथियों ने एक योजना बनायी और गरीबों को भोजन कराने का संकल्प लिया. उनके अलावा शिव कुमार गुप्ता, सुशील कुमार रिंकू, राकेश कुमार भोला, रंजीत कुमार, जितू जैन, कृष्णा कुमार पिंटू, संजय कुमार डब्लू, सत्येंद्र कुमार, संजय गुप्ता, रमेश प्रसाद, पुरुषोत्तम कुमार, संजीव कुमार ने भोजन संचालन में अपनी भूमिका निभायी. आज 13 दोस्तों का संकल्प से गरीबों का पेट भरने का काम आ रहा है.





































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