मुजफ्फरपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है. विभाग का मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में प्रभावी कमी लाने के साथ-साथ आगामी गर्मी के मौसम में एईएस (चमकी बुखार) के खतरे से बच्चों को बचाना है. इसके लिए पूरे जिले में एंबुलेंस नेटवर्क को ‘हाई अलर्ट’ मोड पर डाल दिया गया है.

जिले के हर प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण करते हुए औसतन 4 एंबुलेंस तैनात की गई हैं. मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम करने के लिए सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. उन्हें अपने-अपने कार्यक्षेत्र से प्रतिदिन कम से कम एक हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) मामले की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है.


सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि हमारा प्राथमिक उद्देश्य प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु को शून्य पर लाना है, ताकि किसी भी एचआरपी माता को बिना किसी देरी के हायर सेंटर शिफ्ट किया जा सके.



गर्मी के बढ़ते प्रकोप और चमकी बुखार की आशंका को देखते हुए जिले की सभी 76 एम्बुलेंसों की चौबीसों घंटे सतत निगरानी की जा रही है. सभी गाड़ियां ऑक्सीजन, जरूरी दवाओं और जीवन रक्षक उपकरणों से हमेशा लैस हैं.


आपात स्थिति में 102 नंबर पर कॉल करके इस निशुल्क सेवा का लाभ उठाया जा सकता है. जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रेहान अशरफ ने बताया कि अब हम प्रति एंबुलेंस प्रतिदिन 6 लाभुकों को सेवा देने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं.




















Be First to Comment