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Bihar Weather: पूर्णिया-किशनगंज में झमाझम बारिश से सड़कों पर पानी भरा, 7 जिलों में अल’र्ट जारी

बिहार में मानसून सक्रिय होने के बाद झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है। पूर्णिया और किशनगंज जिले में सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। किसानों के चेहरे पर खुशी की लहर देखने को मिल रही है। किशनगंज शहर की सड़कों पर पानी भर गया है। पूर्णिया में भी बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। महानंदा नदी में जलस्तर फिर खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। वहीं मौसम विभाग ने मंगलवार दोपहर में मोतिहारी, बेतिया, गोपालगंज, सीवान, सारण, आरा, बक्सर समेत 7 जिलों में बारिश होने का अलर्ट जारी किया है।

 

वहीं, किशनगंज में मंगलवार सुबह से हुई बारिश से सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन गई। हालांकि बारिश कम होते ही सड़क से पानी निकल गया। किशनगंज में तो मानसून पूर्व से ही लगातार बारिश हो रही है। मंडन भारती कृषि कॉलेज अगवानपुर सहरसा के मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि किशनगंज में 3 दिन बारिश होने की संभावना है। इस दौरान भारी बारिश भी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि जिले में इस सप्ताह एक दिन में 40 से 50 मिमी भी बारिश हो सकती है। कोसी व सीमांचल में सबसे अधिक किशनगंज में ही बारिश होगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान ई मनोज कुमार राय ने बताया कि लगातार बारिश से धान किसानों को तो फायदा है।

महानंदा खतरे के निशान के करीब

 

पूर्णिया में भी सुबह से मानसून मेहरबान है। किसानों को लंबे समय से मूसलाधार बारिश का इंतजार था। बारिश होने के बाद किसानों ने धान की रोपाई का काम तेज कर दिया है। इस बार 95 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होगी। बारिश के बाद नदियों का जलस्तर बढ़ा है। महानंदा फिर खतरे के निशान के करीब है, जबकि कनकई और परमान में भी जलस्तर बढ़ा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीण राशन स्टॉक करने लगे हैं।

बांका में मौसम बदलने से लोगों को मिली गर्मी से राहत 

 

बांका में भी मंगलवार को मौसम का मिजाज बदला है। हालांकि सुबह बारिश नहीं हुई, मगर पानी गिरने की संभावना बनी हुई है। सुबह से ही आसमान में बादल दिख रहे और धूप में भी नमी बनी रही। मौसम विभाग का मानना है कि यहां अगले कुछ घंटों में जोरदार बारिश होगी। तापमान गिरने से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। अब तक बारिश नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। धान का बिचड़ा अब तक अधिकांश किसानों ने खेत में नहीं डाला है, जिस कारण धान की रोपनी प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है

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