दिल्ली की हवा अब सिर्फ धूल और धुएं से ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक के बारीक कणों से भी प्रदूषित हो चुकी है। हाल ही में हुई एक नई स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि गर्मियों में लोग सर्दियों की तुलना में लगभग दोगुने माइक्रोप्लास्टिक सांस के जरिए अपने शरीर में ले रहे हैं, जिससे सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा की गई इस स्टडी के अनुसार, पहले दिल्ली में प्रदूषण मुख्य रूप से सर्दियों में बढ़ता था, लेकिन अब माइक्रोप्लास्टिक के कण गर्मियों में कहीं ज्यादा पाए गए हैं। इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिख रहा है।



स्टडी में पता चला कि दिल्ली का एक वयस्क सर्दियों में औसतन 10.7 माइक्रोप्लास्टिक कण रोज़ाना सांस लेता था, जो गर्मियों में बढ़कर 21.1 कण हो गया। इसका मतलब है कि गर्मियों में यह जोखिम लगभग 97% बढ़ गया है।



रिसर्च में यह भी सामने आया है कि गर्मी के दिनों में सांस संबंधी बीमारियों के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।




पुणे के IITM और सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर यह स्टडी की। उन्होंने दिल्ली की हवा के नमूनों की जाँच की, जिसमें कुल 2,087 माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए।
































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