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तेजस्वी के विभाग में बड़ा गोलमाल, कागजों पर बच्चों का टीकाकरण; 17 सौ करोड़ का पुल गिर चुका है

मुजफ्फरपुर: नीतीश सरकार के महत्वपूर्ण मंत्री और लालू यादव के लाल तेजस्वी यादव के विभाग में इन दिनों बड़ी बड़ी लापरवाहियां उजागर हो रही हैं। पथ निर्माण विभाग में भागलपुर में 1700 करोड़ की लागत से बन रहा पुल ध्वस्त हो गया तो हड़कंप मच गया। यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि स्वास्थ्य विभाग में बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का केस उजागर हुआ है।  यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

तेजस्वी के विभाग में बड़ा गोलमाल, कागजों पर बच्चों का टीकाकरण; 17 सौ करोड़ का पुल गिर चुका है

सूबे में बच्चों का टीकाकरण कागजों पर हो रहा है। इसका खुलासा यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में हुआ है। इन दोनों संस्थाओं ने टीकाकरण के लिए तय किये गये स्थलों पर औचक जांच के लिए फोन किया। फोन करने पर राज्य के 129 स्थलों पर टीकाकरण का सत्र नहीं चलता पाया गया, जबकि कागजों में यहां टीकाकरण सत्र दिखाया गया था।

यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के बाद राज्य स्वास्थ्य समिति हरकत में आई और मुजफ्फरपुर सहित सभी जिलों को टीकाकरण को लेकर सख्त निर्देश दिया। डीआईओ डॉ एसके पांडेय बताया कि जहां टीकाकरण सत्र नहीं चलता पाया गया, वहां के पीएचसी प्रभारी को शोकॉज किया गया है। टीकाकरण की मॉनिटरिंग के लिए हर मंगलवार को सभी प्रखंडों में एक बैठक होगी। उसकी मॉनिटरिंग के लिए जिले से भी एक नोडल अधिकारी को वहां भेजा गया है।’

औराई, कुढ़नी, साहेबगंज शहरी क्षेत्र में हुआ फ’र्जीवाड़ा राज्य स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले के औराई, कुढ़नी और शहरी क्षेत्र में टीकाकरण के नाम पर फ’र्जीवाड़ा किया गया है। यहां जांच में टीकाकरण सत्र नहीं चलते पाया गया। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि अब हर प्रखंड से टीकाकरण का जो भी डाटा भेजा जायेगा, उसकी जांच होगी। सत्यापन के बाद ही माना जायेगा कि रिपोर्ट में जितने लोगों को टीका दिया गया है, वह सही है। अगर गलत पाया गया तो वहां के प्रभारी और मैनेजर का वेतन बंद कर दिया जायेगा।

11 प्रतिशत बच्चों को बीसीजी का टीका नहीं

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक वर्ष में जिले के 11 प्रतिशत बच्चों को बीसीजी का टीका नहीं लगा है। बीसीजी के अलावा आठ प्रतिशत बच्चों को पेंटावेलेंट नहीं लगा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पूर्ण टीकाकरण से जिले में महज सात प्रतिशत बच्चे ही वंचित हैं। रिपोर्ट के अनुसार ढोली में सबसे कम 36 प्रतिशत टीकाकरण सत्र चलाये गये हैं।

टीकाकरण नहीं होने से फैल रही संक्रामक बीमारी

टीकाकरण में कमी से जिले में संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। हाल में जिले के कई इलाकों में मीजल्स के कई मामले समाने आये हैं। शहरी क्षेत्र के कई हिस्सों में भी मीजल्स के शिकार लोग हो रहे हैं। इसके अलावा अभी कुढ़नी और शहरी क्षेत्र में चिकन पॉक्स का मामला सामने आया है। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि टीकाकरण में गड़बड़ रिपोर्ट पूरी बन रही है।’

 

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