मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर की साहित्य विधा को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि चंपारण में “सत्याग्रह साहित्य सम्मान 2.0” से नवाजा गया है।
मुजफ्फरपुर निवासी अभिषेक प्रियदर्शी ‘राही’ को यह सम्मान मोतिहारी के रघुनाथपुर स्थित डॉ. एसपी सिंह कॉलेज में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। इस समारोह का आयोजन ख्वाब फाउंडेशन की ओर से किया गया था।

अभिषेक मूल रूप से चंपारण के मेहसी प्रखंड स्थित परसौनी देवाजित गांव के मूल निवासी हैं। इनके पिता स्व. शिवशंकर श्रीवास्तव पत्रकार थे और मां स्व. संगीता चैनपुरी शिक्षिका थीं। अभिषेक ने साहित्य विधा में मिले इस सम्मान को अपने माता-पिता और दिवंगत नानाजी गणेश शंकर चैनपुरी को समर्पित किया है।

ख्वाब फाउंडेशन के मुन्ना कुमार ने बताया कि अभिषेक प्रियदर्शी की किताब “अनसुलझी उलझन की बातें” को “सत्याग्रह साहित्य सम्मान 2.0” से नवाजा गया है। इस किताब में समाहित रचनाएं एकदम सरल शब्दों में लिखी गई हैं। इनकी कविताएं मूलतः इंसान के जीवन का प्रतिबिम्ब हैं। मां पर लिखी कविता को पढ़ने वाले हर पाठक को उसमें स्वयं का प्रतिबिम्ब झलकता है।

अपनी रचनाओं से अभिषेक ने एक सुंदर और अपनत्व से भरा संसार बसाने का प्रयास किया है।
उन्होंने लिखा है-
कोई ऊंच कहे, कोई नीच कहे
कोई रंगभेद का मान करे!
बंदे हम सब भगवान के हैं
फिर अंतर क्यों इंसान करे!!
कुल मिलाकर कहा जाए तो इनकी कविताएं बहुत ही सहज शब्दों में लड़कपन से अपनेपन तक का एहसास कराती हैं।


अभिषेक ने बताया कि मेरे छोटे भाई चंदन विश्वास और शक्ति सौरभ ने मुझे हमेशा लिखने के लिए उकसाया। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. हरनेक सिंह गिल और डॉ. बलबीर कुंदरा ने शब्दों को सींचकर काव्यमाला में पिरोने के लिए हौसला बढ़ाया है। मेरी अर्धांगिनी महालक्ष्मी प्रियदर्शी ने भी कलम की ताकत को बुलंद करने में भरपूर साथ दिया है।


यह सम्मान इन सबके उकसावे का ही परिणाम है।उन्होंने बताया कि मेरा मंझला भाई चंदन विश्वास भी अंग्रेजी साहित्य जगत का उभरता चेहरा हैं। उसकी रचना “फेंक लव एंड ट्रू फीलिंग्स” को पाठकों ने खूब सराहा है। उसकी नई रचना “द अनसक्सेसफुल इंटरप्रेन्योर” बहुत जल्द ही पाठकों के हाथों में दस्तक देने वाली है।









































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