विश्व कठपुतली दिवस की पूर्व संध्या पर कठपुतली संवाद व कार्यशाला का आयोजन स्थानीय हरखू चौधरी टोला में सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान व बिहार राज्य जनवादी सांस्कृतिक मोर्चा ‘विकल्प’ की नवोदित इकाई द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नवोदित इकाई की साथी कृति कुमारी द्वारा शहीदगान “जो मेहनतकश इंसानों को वास्ते हुए कुर्बान उनको मेरा लाल समय” प्रस्तुत कर किया गया।

कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने कठपुतली कला के इतिहास को बताते हुए कठपुतली बनाने के विभिन्न तरीकों को बताया। इसके माध्यम से समाज को बेहतर बनाने व इस कला को बचाने के लिए नये कलाकारों की पौध तैयार करने पर जोर दिया। “विकल्प” की मालीघाट इकाई की सचिव साथी पूजा कुमारी ने बताया की आज के दौड़ में कठपुतली कला लुप्त हो चुकी है। उसे फिर से जीवित करने की जरुरत है। यह एक ऐसी कला है जो आम आवाम की रोज़मर्रे की समस्याओं का हल मनोरंजन के साथ साथ बहुत ही सहज़ व् साफगोही के साथ बताती है।



गांधीवादी व सामाजिक कार्यकर्त्ता साथी सोनू सरकार ने बाल मन को समझने व उसके विकास के लिए कठपुतली कला को एक कारगर हथियार बताया। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए इन कलाओं का मंचन करना आज के समय की मांग बताया। कवि अभय कुमार ‘शब्द’ द्वारा कठपुतली पर लिखित एक कविता का पाठ किया गया। ‘विकल्प’ के नवोदित इकाई के अध्यक्ष साथी राजू कुमार ने कहा की कला का सानिध्य पाकर एक कलाकार बनते-बनते कब एक इंसान बेहतर बन जाता है यह मालूम ही नहीं पड़ता है। फिर वही मनुष्य सामाजिक परिवर्तन के लिए उठ खड़ा होता है। इसके बाद नवोदित इकाई के बाल कलाकारों द्वारा कई जनगीतों की प्रस्तुति दी गई।



विनोद कुमार ‘रजक’, अंश कुमार, दीपक कुमार, आनंद कुमार, निशा कुमारी आदि ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में शामिल कलाकारों को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तन्नू कुमारी, मन्नू कुमार, इंदु देवी, सविता देवी, अभिषेक कुमार, मनी कुमार, रिया कुमारी, निशा कुमारी, पुष्पांजलि कुमारी, रितु कुमारी, बिंदिया कुमारी, अमोल कुमार, अंश कुमार, साक्षी कुमारी आदि उपस्थित थे। मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन राजू कुमार ने किया।














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