बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल अब तेजी से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। वर्षों तक अनदेखी रही कहानियां अब विकास की रफ्तार के साथ धीरे-धीरे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करने लगी हैं। गांवों का शांत वातावरण, मिलनसार लोग और रहस्यमयी जगहें किसी भी व्यक्ति में गहरा लगाव पैदा करती हैं।

राज्य एवं उसके बाहर के खोजी पर्यटकों व धार्मिक लोगों के लिए ये अनोखा अनुभव बनता जा रहा है। इन स्थलों को पिछले कुछ वर्षों में विकसित किया गया है। इसके लिए शहरों से गांवों तक पक्की सड़क का निर्माण, बेहतर परिवहन सुविधा, बिजली, हाट-बाजारों का आधुनिकीकरण, पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। कैमूर जिला अपने पहाड़ों और नदियों के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है, लेकिन इसकी पौराणिक गाथाएं भी कम आकर्षक नहीं हैं।


रामगढ़ प्रखंड मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर अकोढ़ी गांव स्थित है, जहां एक जागृत शक्तिपीठ और सिद्धपीठ है। कहते है कि वर्ष 1982-83 में यहां नौ दिवसीय विशाल यज्ञ का आयोजन हुआ था, जिसमें चारों पीठों के शंकराचार्य शामिल हुए थे।



गांव में दुर्गावती नदी के तट पर स्थित प्राचीन देवी मंदिर श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहा है। नदी के पूर्वी छोर पर जौहरी मां का मंदिर और पश्चिमी छोर पर हनुमानगढ़ी मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण गाजीपुर के संत सत्यनारायणाचार्य जी महाराज ने करवाया था।


यहां हर वर्ष हनुमान जयंती पर 21 विद्वान पंडित 108 बार सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इस दिन गांव में आस्था का बड़ा संगम देखने को मिलता है। मकर संक्रांति के अवसर पर यहां खिचड़ी भोज का आयोजन होता है, जिसमें पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क ठहरने की व्यवस्था भी उपलब्ध है।


























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