बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर शहर के मालीघाट में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को दिवंगत शिक्षिका संगीता चैनपुरी की स्मृति में सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान की ओर से पुरखा पुरनिया संवाद सह सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इसमें मुख्य अतिथि युवा समाजसेवी एवं कवयित्री मुस्कान केशरी को शिक्षिका संगीता चैनपुरी स्मृति सम्मान, अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न, पुस्तक अनसुलझी उलझन की बातें भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की संरक्षक कांता देवी ने की। कांता देवी ने कहा कि शिक्षिका संगीता चैनपुरी शिक्षा को ही अपना गहना मानती थीं। वे पुरखा पुरनिया संवाद कार्यक्रम में अपने काव्य पाठ से मंच को सुशोभित करती रहती थीं।

मुख्य अतिथि एमएस केशरी पब्लिकेशन की संस्थापिका मुस्कान केशरी ने कहा कि मां बच्चों की खुशी के लिए अपनी इच्छाओं और सुखों का त्याग करती है। मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि बच्चे को शिक्षा, संस्कार और सुरक्षा प्रदान करती है। हमें अपने माता-पिता के साथ साथ पुरखा पुरनिया से सीख लेने की जरूरत हैं।



संस्थान के संयोजक कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने ए ही माटी के संगीता चैनपुरी समाजसेविका के मिलल सेहरा… गीत के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित किया। मौके पर अभिषेक प्रियदर्शी, शक्ति सौरभ, आदर्श रंजन, शिव कुमार, अनिल कुमार ठाकुर, केशव राय, शिवम कुमार उपस्थित थे।



धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का जश्न मनाने और लैंगिक समानता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने का एक वैश्विक मौका है।




















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