बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की भारी जीत और जन सुराज की करारी हार के बाद राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के वोट को आर्थिक सहायता के बहाने खरीदा गया।

भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम में गुरुवार को प्रायश्चित उपवास और मौन व्रत रखने के बाद किशोर ने कहा कि यह उनकी हार के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर हुए अन्याय के कारण कठिन समय था। उनका दावा है कि चुनाव के दौरान महिलाओं के खाते में रोज़ाना साढ़े पांच रुपए प्रति दिन भेजकर जीविका दीदियों के माध्यम से वोट बैंक को नियंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि यह तरीका गरीब लोगों के अधिकारों के साथ अन्याय है, जिन्होंने अपनी उम्मीदों और बच्चों के भविष्य के सपनों के बदले राजनीतिक खेल का शिकार होना पड़ा।

किशोर ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार खुद ईमानदार नेता हैं, लेकिन उनके नाम का उपयोग कर भ्रष्टाचार और वोटिंग में मनमानी की गई। वर्ल्ड बैंक से मिलने वाले कर्ज का पैसा डायवर्ट कर जनता के खाते में भेजा गया, जिससे चुनावी परिणाम पर सीधा असर पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार कर लिया गया तो सत्ता में रहने वाली पार्टी कभी चुनाव हारने की स्थिति में नहीं होगी।










































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