बिहार से नेपाल और बांग्लादेश तक प्रतिबंदित दवाओं की त’स्करी होती है। मुजफ्फरपुर उत्पाद विभाग की टीम ने इसका पर्दाफाश किया है। सीवान से अररिया होकर नेपाल व बांग्लादेश तक कोडीन युक्त कफ सीरप की त’स्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अररिया में होटल संचालक मनोज भगत सिंडिकेट का सरगना है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम छापेमारी कर रही है। उत्पाद विभाग के बॉर्डर चेकपोस्ट पर मंगलवार देर रात सीवान से आ रही पिकअप वैन पकड़ी। वैन से 36 कार्टन कोडीन युक्त प्रतिबंधित कफ सीरप बरामद हुआ।
मौके से सीवान के ललन रजक और मुन्ना सिंह पकड़ा गया। दोनों से पूछताछ में बताया कि उक्त सीरप का उपयोग न’शे के लिए किया जाता है। कफ सीरप के धं’धे का नेटवर्क अररिया से जुड़े होने की जानकारी दी। उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार राय ने बताया कि सीवान के दो ट्रांसपोर्ट ने हिमांचल प्रदेश से कफ सीरप की खेप मंगवाई थी जिसे पिकअप से अररिया के होटल व्यवसायी मनोज भगत को पहुंचाया जाना था। मनोज भगत का करीबी हलीम आलम लगातार पिकअप वैन के मालिक सह चालक ललन रजक से मोबाइल पर संपर्क में था। ललन के पास उसका मोबाइल नंबर था।
इसके आधार पर एएलटीएफ प्रभारी मो. सुजाउद्दीन के सहयोग से उत्पाद टीम ने अररिया में छापेमारी कर हलीम को दबोचा। उससे पूछताछ में मनोज भगत का नाम सामने आया और जब्त माल को नेपाल व बंगलादेश भेजने के रैकेट के बारे में पता चला। हिमाचल प्रदेश की कंपनी पर भी होगी कार्रवाई उत्पाद अधीक्षक संजय राय ने बताया कि कफ सीरप हिमाचल प्रदेश निर्मित है। रैपर पर कंपनी का नाम व बैच आदि तमाम ब्योरा अंकित है। इस कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा जा रहा है।
सीवान व अररिया में टीम कर रही छापेमारी
मनोज भगत लंबे समय से प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सीरप पड़ोसी देश में त’स्करी कर रहा था। उसके नेटवर्क में सीवान का ट्रांसपोर्टर मरही चौधरी, उसका पुत्र सोनेलाल चौधरी और एक तिवारी नाम का व्यक्ति जुड़ा है। मामले में मनोज भगत व सीवान के दोनों ट्रांसपोर्टर की गिरफ्तारी के लिए सीवान व अररिया में छापेमारी चल रही है।
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