कठपुतली संवाद का आयोजन मुजफ्फरपुर जिले के मालीघाट में एक्टिविस्ट 100 के संयोजक सोनू सरकार की अध्यक्षता में की गई। सोनू सरकार ने बताया कि भारत कठपुतली की मातृभूमि होने के बावजूद भी हमारे देश के लोगों को इस अद्भुत कला के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं हैं और न ही नई पीढ़ी पिछले कई वर्षों में कठपुतली को देखा हो।

सरला श्रीवास सामाजिक सांस्कृतिक शोध संस्थान के संयोजक कठपुतली कलाकार सुनील कुमार ने बताया कि माता पार्वती के प्रसन्नता हेतु देवों के देव महादेव ने काष्ठ के मूर्ति में प्रवेश कर कठपुतली कला की शुरुआत की थी। लोक गायिका अनिता कुमारी ने बताया कि रचनात्मकता और सरलता का जश्न मनाती कठपुतली एक समृद्ध और विविध इतिहास वाली एक कला है जो बच्चों और वयस्कों दोनों को पसंद आती है। यह प्रदर्शनी परिवारों के लिए शैक्षिक, व्यावहारिक अवसर प्रदान करते हुए उस इतिहास का जश्न मनाती है।



नाट्य निर्देशक प्रमोद आजाद ने बताया कि कठपुतली के जरिये बच्चों में सर्जनात्मकता का विकास होता है. उनमें जानने की रुचि पैदा होती है।पुतलियों के निर्माण तथा उनके माध्यम से विचारों के संप्रेषण में बच्चों को आनंद मिलता है, बच्चों के व्यक्तित्व के चहुंमुखी विकास में सहायक होता है।



इस अवसर पर नाट्य निर्देशक प्रमोद आजाद, एक्टिविस्ट 100 के संयोजक सोनू सरकार,विनोद कुमार रजक को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन सरला श्रीवास युवा मंडल की अध्यक्ष सुमन कुमारी ने दिया और बताया कि सरला श्रीवास की पुण्यतिथि 21 मार्च को विश्व कठपुतली दिवस के रूप में मनाया जाएगा।





















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