दिल्ली से सटे गाजियाबाद में फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है जिसने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क को पकड़ा है जो बंद घरों के पतों का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से पासपोर्ट जारी करवा रहा था।

इस मामले में पुलिस ने एक पोस्टमेन (डाकिया) सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बड़े घोटाले का खुलासा तब हुआ जब पासपोर्ट सिस्टम में एक छोटी-सी गड़बड़ी पकड़ी गई। दर्जनों पासपोर्ट आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा था। गाजियाबाद के लोनी इलाके में कुछ घरों के पते पर 22 से ज्यादा पासपोर्ट जारी हो चुके थे।


जब पुलिस पते की जांच करने पहुंची तो पता चला कि उन घरों में कोई रहता ही नहीं था। वहां न तो उन नामों का कोई व्यक्ति कभी दिखा और न ही कभी कोई वहां रहने आया। यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था।


गिरोह ऐसे मकानों को चुनता था जो लंबे समय से बंद थे या खाली पड़े थे। इस खेल में डाकिया मुख्य कड़ी था। पासपोर्ट जब डाक से वेरिफिकेशन के लिए आता तो डाकिया उसे घर तक ले जाने के बजाय सीधे गिरोह के सदस्यों को थमा देता था।


पुलिस के वेरिफिकेशन चरण में भी साठगांठ की आशंका जताई जा रही है जिसकी जांच चल रही है।















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