तीर्थ स्थल अहल्यास्थान में चल रहे 14 वें राजकीय अहल्या गौतम महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कड़ाके की ठंड में जब हाथ जेब से निकलने से कतरा रही थी, तब सुरों और एक शानदार गजल प्रस्तुति की गर्माहट ने दिलों में उमंग का संचार कर दिया.

कला, संस्कृति और अध्यात्म के संगम ने पूरे वातावरण को अपनी आगोश में ले लिया. देर रात तक भजनों ने भक्तिरस घोला तो गजलों ने इश्क व मुश्क की बानगी पेश की, तो वाह-वाह कर तालियां बजाते श्रोताओं ने सर्द मौसम में रूहानी गजलों की गर्माहट को महसूस की.


14 वें राजकीय अहल्या-गौतम महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में देर रात नौ बजे जब प्रसिद्ध गजल गायक कुमार सत्यम ने जब अपनी खनकती आवाज का जादू बिखेरी, तो सर्द रात में श्रोताओं के हाथ जेब से निकलकर तालियां बजाने को विवश हो गये. कुमार सत्यम ने ”खामोश लव है झुकी है पलकें, दिलों में उल्फत नई-नई है जैसे सदाबहार गजल की प्रस्तुति से नए-नए सफल हुए लोगों के लहजे पर तंज कसा.


इसमें उन्होंने खानदानी रईस और नई दौलत के बीच के फर्क को दर्शाया. हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह और हमरी रे अटरिया पे आजा रे सांवरियां जैसे मशहूर गजलों से रूहानी गर्माहट का एहसास कराया. वहीं सूफी और उप शास्त्रीय संगीत पर आधारित कई लोकप्रिय व भावनात्मक गजल गाकर महोत्सव में चार चांद लगा दिया.


कुमार सत्यम ने जब अपने मखमली आवाज में ”याद-याद-याद बस याद रह जाती है” को शायराना अंदाज में पेश किया तो दर्शक झूमने को विवश हो गए. इससे पहले अपूर्वा प्रियदर्शी, डॉली सिंह, रामबाबू झा की मैथिली और हिंदी फिल्मी गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कराया था.”झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में जैसे लोकप्रिय गीत पर दर्शक झूमने लगे थे.



















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