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हेलमेट मैन ऑफ इंडिया शुरू करेंगे संजीवनी बूटी मिशन

भारत में सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को सिर्फ एक रुपए में हेलिकाप्टर एयर एंबुलेंस की सुविधा मिलेगी. यह खबर किसी भी भारतीय नागरिक के लिए सुनकर एक सपना जैसा लगेगा क्योंकि ऐसी बात सिर्फ फिल्मों में होती हैं हकीकत में नहीं. सड़क दुर्घटना के खिलाफ पिछले 12 वर्षों से लड़ाई लड़ने वाले हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार इस मिशन की शुरुआत अगले वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश राज्य के यमुना एक्सप्रेसवे पर 3 हेलीकॉप्टर एंबुलेंस के साथ पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रहे हैं.

इस मिशन का नाम उन्होंने संजीवनी बूटी मिशन रखा हैं. हाल ही में एयर इंडिया टाटा के साथ उसके हेड ऑफिस गुड़गांव वाटिका में कई बड़े अधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा पर उनकी मीटिंग हुई. Air india के CEO campbell Wilson ने हेलमेट मैन ऑफ इंडिया को सम्मानित किया.

हेलमेट मैन ऑफ इंडिया राघवेंद्र कुमार ने अधिकारियों के बीच अपने विजन को एक H3 फॉर्मूला में शेयर किया. H3 का फूल फार्म हेलिकाप्टर, हाइवे, और हॉस्पिटल है. इसका ब्लू प्रिंट एक हेलमेट के ऊपर भी तैयार करके लेकर पहुंचे थे. लोगों ने हेलमेट मैन ऑफ इंडिया के मिशन को ऐतिहासिक बताया. एक हेलीकॉप्टर का लीज खर्च एक साल  के लिए 7 करोड रुपए हो रहा है जो 500 घंटे उड़ेगी. इसमें फ्यूल और स्टाफ के खर्च भी इंक्लूड है. तीन हेलीकॉप्टर के लिए एक साल का लीज खर्च 21 करोड रुपए हो रहा है.

इस प्रोजेक्ट के लिए जितनी धनराशि की आवश्यकता है सड़क पर टोल से गुजर रही प्रति गाड़ी से सिर्फ ₹1 सर्विस के नाम पर लिया जाए तो महीने में 3 करोड रुपए प्राप्त होंगे. और इस तरह साल में 36 करोड रूपए की धनराशि प्राप्त हो रही हैं. बची धनराशि से हॉस्पिटल और एक्सप्रेसवे के सर्विस रोड पर कार एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जा सकती है.

इस योजना पर काम करने के लिए भारत के अलावा कुछ विदेशी कंपनियों ने भी अपना प्रस्ताव भेजा हैं. दिल्ली एनसीआर से सटे एक्सप्रेसवे के पास कई बने हॉस्पिटल अपने यहां हेलीपैड बनवाने की तैयारी कर रहे हैं. बहुत जल्द उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी  हेलमेट मैन मुलाकात करेंगे. इस मिशन में भारतीय सेना भी उनका सहयोग कर रही हैं. वैसे यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले भी फाइटर प्लेन अभ्यास के तौर पर उतारा जा चुका है. इस यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों में हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. जिसमें भारतीय सेना के जवान और पुलिस भी शामिल हैं जिन्हें सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका.

भारत सरकार का कहना है अगर गोल्डन आवर में लोगों को अस्पताल पहुंचाया जाए तो मिनिमम 60 हजार लोगों की जिंदगी एक वर्ष में बचाई जा सकती है. हर वर्ष 2 लाख के करीब नागरिक सड़क हादसे में अपनी जान गवां रहे हैं. भारत सरकार के अनुसार सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत पर 90 लाख से अधिक राजस्व का नुक्सान होता हैं.

आम आदमी के लिए हेलीकॉप्टर एंबुलेंस की योजना हर भारतीय के लिए क्रांतिकारी होगी. हेलमेट मैन पिछले 12 वर्षों से सड़क दुर्घटनाओं के खिलाफ एक अदृश्य युद्ध की लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने सड़क हादसे में अपने रूम पार्टनर मित्र कृष्णा को एक हेलमेट ना लगाने के कारण नोएडा एक्सप्रेसवे पर 2014 में खो दिया था. तब से भारत के हर नागरिक को अपना मित्र बनाने के मिशन पर हैं.

सड़क दुर्घटना पर विजय पाने के लिए लोगों की जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अब तक भारत के 22 राज्य के सड़कों पर घूम कर 75 हजार से अधिक हेलमेट बांट कर हजारों लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं. और आज भारत के तीनों सेनाओं के बीच जाकर उनका मार्गदर्शन लेकर अपने मिशन की ओर आगे बढ़ रहे हैं. वे कहते हैं हमारा भारत सड़क दुर्घटना का गुलाम हो चुका है, और इस दुर्घटना पर विजय के बाद ही भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा.

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