हौसले और संकल्प की एक ऐसी कहानी बिहार के भागलपुर से सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया है। जिले के घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह गांव की रहने वाली एक छात्रा ने साबित कर दिया कि पिता के सपनों को पूरा करना ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है।

घर में पिता का पार्थिव शरीर रखा था, लेकिन दुखों के पहाड़ को पार कर वह छात्रा मैट्रिक की परीक्षा देने केंद्र पहुंची और पेपर खत्म करने के बाद ही पिता का अंतिम संस्कार किया।



जानीडीह निवासी राजकिशोर महतो पिछले 22 महीनों से ‘ओरल कैंसर’ (मुंह के कैंसर) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी इतनी भयावह थी कि इलाज के दौरान उनकी जीभ काटनी पड़ी थी और वह लंबे समय से बोल पाने में असमर्थ थे।



नाक में लगी पाइप के जरिए उन्हें तरल आहार दिया जा रहा था। पूरा परिवार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद में सेवा में जुटा था, लेकिन शुक्रवार की आधी रात राजकिशोर महतो जिंदगी की जंग हार गए।




















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