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आजादी का अमृत महोत्सव: खादी ग्रामोद्योग में 50 सालों से तैयार हो रहा तिरंगा, यूपी-बंगाल, झारखंड तक है डिमांड

गोपालगंज: जिस तिरंगे को प्रतिक मानकर हमारा देश गुलामी की बेड़ियों से आजाद हुआ, उस तिरंगे का अपना अलग ही महत्व है.

सबसे पुराने कारीगर समसुल मियां बताते हैं कि उन्हे तिरंगा बनाने में उन्हे बहुत मन लगता है.

आजादी के अमृत महोत्सव के राष्ट्रीय पर्व पर इस तिरंगे की मांग और बढ़ गयी है. गोपालगंज के खादी ग्रामोद्योग की कहानी  है, जहां 50 सालों से तैयार हो रहे तिरंगे को बिहार ही नहीं, पड़ोसी राज्य यूपी, बंगाल, झारखंड तथा ओड़िसा में भी फहराया जाता है.

गोपालगंज के कॉलेज रोड स्थित खादी ग्रामोद्योग संघ के भवन में तैयार हो रहे इस तिरंगे की डिमांड सिर्फ गोपालगंज में ही नहीं, बल्कि इस तिरंगे की डिमांड इतनी है कि पड़ोसी राज्य यूपी-बंगाल और झारखंड तक सप्लाई की जाती है. यहां पर तिरंगे के निर्माण के लिए कुशल एवं प्रशिक्षित कारीगर दिन-रात मेहनत करते हैं।

सबसे पुराने कारीगर समसुल मियां द्वारा बताया गया हैं कि उन्हे तिरंगा बनाने में बहुत मन लगता है. वहीं खादी ग्रामोद्योग के संयोजक भोला प्रसाद ने बताया कि इस खादी ग्रामोद्योग में पिछले 50 साल से तिरंगे का निर्माण जारी है.

यहां के बनाये हुए तिरंगे विभिन्न प्रांतों में सप्लाई किए जाते हैं. क्योंकि यहां के बने तिरंगे में शुद्धता, गुणवत्ता और कीमत का भी ख्याल रखा जाता है. तिरंगों की डिमांड इतनी होती है कि महीनों पहले से ही इनकी बुकिंग हो चुकी होती है.

मानकों के अनुसार ही बनाया जाता है तिरंगा 

गोपालगंज खादी ग्रामोद्योग संघ के सचिव अनूज सिंह ने बताया कि यहां हाथ से कटाई किए गए कपड़े को सबसे पहले बनाया जाता है. फिर उसे मानक के अनुसार तिरंगे का रूप दिया जाता है. तिरंगों के मानक के अनुसार ही विशेष लंबाई-चौड़ाई के हिसाब से इनकी कीमत साइज के अनुसार तय की जाती है. तिरंगा ढाई सौ से लेकर तीन सौ रुपये में बिकता है. आजादी के अमृत महोत्सव के साथ मनाई जा रही स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तो इन तिरंगों की सेल से ज्यादा यहां बन रहे तिरंगे की खुबसूरती देखने को मिलती है.

 

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