बिहार के भभुआ में कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय सभी हैरान रह गए, जब कुछ 6 से आठ साल के मासूम बच्चे शिकायत करने डीएम से मिलने पहुंचे। डीएम ऑफिस में उन्होंने शिकायत में बताया कि स्कूल में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की व्यवस्था बिल्कुल भी ठीक नहीं है। शौच के लिए खेत में जाना पड़ता है। स्कूल में कई टीचर गालियों के लहजे से ही छात्रों से बात करते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, जल संकट से जूझ रहे सिकंदरपुर के मासूम बच्चे शनिवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और एनडीसी से मिलकर उत्क्रमित मिडल स्कूल सिकंदरपुर में पेयजल का प्रबंध कराने की गुहार लगाई। इन बच्चों ने न सिर्फ पेयजल, बल्कि अन्य समस्याएं भी अधिकारी के समक्ष रखी। शिक्षा व्यवस्था से लेकर शिक्षकों के व्यवहार पर भी चर्चा की। स्टोनों ने बच्चों के आने की सूचना डीएम को दी। कार्य में व्यस्त रहने के कारण डीएम छात्रों से नहीं मिल सके।
उन्होंने समस्या के समाधान के लिए स्टोनो के माध्यम से छात्रों को एनडीसी अमरेश कुमार अमर के पास भेज दिया। डीएम कार्यालय के बाहर मिले 7 साल के छात्र अमित कुमार शर्मा, संदीप कुमार पासवान,पंकज कुमार और 8 सालके छात्र चंद्रदीप कुमार एवं राजा कुमार पाल ने अधिकारी को बताया कि स्कूल का चापाकल करीब 5 दिनों से खराब है। हमलोग घर से बोतल में पानी लाकर प्यास बुझाते हैं।
छात्रों ने यह भी बताया कि स्कूल में थाली-प्लेट भी काफी कम है। एमडीएम खाने के लिए भी हमलोग अपने घर से बर्तन लाते हैं। स्कूल में शौचालय भी नहीं है। पठन-पाठन के दौरान जब शौच महसूस होता है तब उन्हें खेत में जाना पड़ता है।
छात्र मुकेश कुमार विश्वकर्मा तथा मिथिलेश पासवान ने कहा कि स्कूल में पठन-पाठन का कार्य सही ढंग से नहीं हो रहा है। छात्रों को यह भी कहते सुना गया कि शिक्षक प्रतिदिन स्कूल में विलंब से आते हैं। प्रार्थना कभी भी समय पर नहीं होती है। प्रार्थना के बाद कुछ शिक्षक एक जगह बैठकर आपस में लुडो खेलते हैं।
आठवीं वर्ग के छात्र विवेक पाल तथा अनुराग पाल ने कहा कि स्कूल के एक-दो शिक्षक हम छात्रों को गाली के लहजे में ही बोलते हैं। छात्रों ने इसके अलावा भी अफसरों को अपनी कई समस्याएं सुनाई। छात्रों का कहना था कि अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो हम लोगों की पढ़ाई चौपट हो जाएगी। भविष्य अंधकार में हो जाएगा। एनडीसी अमरेश कुमार अमर ने बताया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी को छात्रों की समस्याओं से अवगत करा दिया गया है। डीईओ को मामले की जांच कर छात्रों की समस्या का समाधान करने की बात कही गई है।
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