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दो वक्त की रोटी कमाने विदेश गए बिहार के 50 लोग फंसे, कड़ाके की ठंड में भूख से तड़प रहे

बिहार के रहने वाले करीब 50 कामगार तजाकिस्तान की एक कंपनी में फंस गए हैं। ये सभी गोपालगंज और सीवान जिले के रहने वाले हैं। तजाकिस्तान की कंपनी ने कड़ाके की ठंड में इन कामगारों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।

दो वक्त की रोटी कमाने तजाकिस्तान गए बिहार के 50 लोग फंसे, कड़ाके की ठंड में भूख-प्यास से तड़प रहे

मिली जानकारी के मुताबिक, ये भूखे प्यासे रह रहे हैं और उनमें से कई बीमारी से ग्रसित हो गए हैं। कामगारों ने अपने परिजन को विदेश से वीडियो संदेश भेज कर अपनी पीड़ा सुनाई और वतन वापसी के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है।

बताया जा रहा है कि रोजगार के लिए ये कामगार तजाकिस्तान में पोफी के जीडीएम कंपनी में टेक्नीशियन, ड्राइवर व सहायक के रूप में काम करने गए थे। 2 जनवरी को दिल्ली से सभी युवक रवाना हुए थे। फंसे कामगारों में कुचायकोट प्रखंड के गोपालपुर थाने के ढेबवां गांव के दुर्गेश तिवारी ने बताया कि बीमारी की हालत में कंपनी उन्हें इलाज भी उपलब्ध नहीं करा रही है।

हुस्सेपुर के कृष्णा पटेल, भोरे के अर्जुन कुमार,नवादा परसौनी के कृष्णा कुमार, लोहजीरा के अहमद अली, बथुआ के मुमताज अंसारी, फतेहपुर के समसुद्दीन खान,भोरे के लक्ष्मण यादव के साथ सीवान के बासु पाली के विवेक कुमार व धनजी कुमार, मंडरा पाल के सुनील कुमार सिंह, लहेजी के धर्मेंद्र मांझी आदि करीब चार दर्जन कामगार वहां फंसे हुए हैं।

सीवान के विजय कुमार और जिले के ढेबवां के दुर्गेश तिवारी ने व्हाट्सएप मैसेज कर बताया है कि अलग-अलग एजेंट के माध्यम से यहां एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च कर रोजगार की तलाश में पहुंचे हैं। कंपनी में काम के दौरान इनकी स्थिति बंधुआ मजदूर जैसी बना दी गई है।

परिजन डीएम से मिल कर लगाएंगे गुहार

ढेबवां गांव के तजाकिस्तान में फंसे दुर्गेश कुमार के पिता नागेंद्र तिवारी ने बताया कि वहां सभी संकट में हैं। वे लोग डीएम से मिलकर कामगारों की सुरक्षित वतन वापसी कराने की मांग को लेकर आवेदन देंगे। परिजन ने स्थानीय सांसद से भी वतन वापसी कराने की मांग की है।

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