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कल 27 अप्रैल को खुलेंगे बदरीनाथ के कपाट, शंख न बजाने और दीपक से जुड़ी कथा जानें ……

कल 27 अप्रैल गुरुवार को सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर भू बैकुंठ बदरीनाथ  के कपाट खोल दिए जाएंगे। इसके तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिर के विराट सिंहद्वार और मंदिर में हजारो टन फूलों से सजाया गया है। साक्षात भू बैकुंठ माने जाने वाले श्री बद्रीनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार को प्रातः शुभ मुहूर्त पर खुलेंगे। आपको बता दें कि चारधाम यात्रा शुरू हो गई है। केदारनाथ धाम के कपाट भी 25 मार्च को खोल दिए गए थे।  बद्रीनाथ के कपाट के उद्घाटन के लिए भव्य रूप से बद्रीनाथ मंदिर के सिंहद्वार समेत पूरे परिसर को हजारों फूलों से सजाया गया है।

27 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट, 18 फरवरी को घोषित होगी केदारनाथ  धाम खुलने की तारीख | uttrakhand chardham yatra 2023, The doors of Badrinath  Dham will open on 27th

बदरीनाथ धाम के बारे में कहा जाता है कि जब कपाट खुलते हैं तो एक दीपक जलता मिलता है। इसके रहस्य का कोई पता नहीं लगा पाया है कि ये दीपक बंद कपाट में इतने लंबे समय तक कैसे जलता है। इसके अलावा बदरीनाथ धाम की पूजा को लेकर कहा जाता है कि यहां भगवान की पूजा में शंख नहीं बजाया जाता है। इसके अलावा शंख नहीं बजाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं।यह कहानी भी प्रचलित है कि एक बार मां लक्ष्मी बद्रीनाथ में बने हुए  तुलसी भवन में ध्यानमग्न थीं। तभी भगवान विष्णु ने शंखचूर्ण नाम के एक राक्षस का वध किया था। जीत का जश्न मनाने के लिए पहले शंख बजाया जाता था, लेकिन विष्णु जी लक्ष्मी जी के ध्यान में विघ्न नहीं डालने चाहते थे, इसलिए उन्होंने शंख नहीं बजाया।

कहा जाता है कि तभी से बद्रीनाथ में शंख नहीं बजाने की परंपरा है। बदरीनाथ सहित चारधामों के कपाट हर साल अक्टूबर-नवंबर में सर्दियों में बंद हो जाते हैं जो अगले साल फिर अप्रैल-मई में खुलते हैं।

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