सीएम नीतीश कुमार की भूमिका अब केंद्र की राजनीति में दिखने वाली है. उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद एनडीए के नेताओं की तरफ से कई बयान आए.

मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, यह मुख्यमंत्री का निर्णय था कि वे राज्यसभा जाएं. 2014 से ही उनको देख रहे हैं. अब सीएम नीतीश के नहीं रहने से उनकी कमी खलेगी. उनका डांटना, समझाना, बीच-बीच में खड़े होकर मंत्रियों को प्रोटेक्ट करना यह सब मिस करेंगे.

सीएम के साथ कनेक्शन पर कहा, उनका स्नेह तो सबके साथ है. छोटे से स्टाफ से लेकर मंत्री तक के साथ उनका स्नेह रहा है. वो एक मुख्यमंत्री या नेता नहीं बल्कि अभिभावक हैं. देश को ऐसा नेता ना कभी मिला और ना ही आने वाले समय में मिलेगा.



उन्होंने सिर्फ अपने राज्य की चिंता की. अपने लिए उन्होंने कोई राजनीति नहीं किया. बिहार उनके गार्जियनशिप में चला है और आगे भी चलता रहेगा.



बीजेपी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी बयान जारी कर कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने आज विधान परिषद से इस्तीफा देकर एक और राजनैतिक मानदंड स्थापित किया. वह हमेशा से संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करने वाले रहे हैं. अब वह दिल्ली में रहकर बिहार की आवाज को और बुलंद करेंगे.


























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