होलिका दहन को धर्म की जीत और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से इसे शास्त्रों में बताए गए शुभ समय पर करना जरूरी बताया गया है, ताकि पूजा का सकारात्मक प्रभाव मिले और घर-परिवार में मंगल ऊर्जा का संचार हो।

विशेष रूप से भद्रा काल का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस समय होलिका दहन करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होते।धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भद्रा के दौरान किया गया दहन अशुभ परिणाम दे सकता है। इसलिए विद्वान हमेशा सलाह देते हैं कि भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाए।



अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और तिथि के अनुसार मुहूर्त बदल जाता है, इसलिए स्थान अनुसार सही समय जानना जरूरी होता है।होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी।



3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, जो शाम तक प्रभाव में रहेगा। चूंकि पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को जल्दी समाप्त हो जाएगी और ग्रहण का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से 2 मार्च की संध्या को होलिका दहन करना अधिक उचित और शुभ माना जा रहा है।



















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