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दिनकर का साहित्य भारतीय संस्कृति, सभ्यता व परम्पराओं का आईना

समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. शशि भूषण कुमार शशि की अध्यक्षता में किया गया. संगोष्ठी का विषय ´राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के साहित्य में राष्ट्रीय भावना` था.

इस संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के तैल्य चित्र पर माल्यार्पण तथा पुष्पांजलि अर्पित करते श्रद्धांजलि देकर किया गया. प्रधानाचार्य ने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्याकाश के दैदीप्यमान सूर्य थे. उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से भारतीय योद्धाओं में उत्साह, उमंग व पौरूष का भाव भरने का ऐतिहासिक कार्य किया.

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके ओज पूर्ण विचारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. उनके ओजपूर्ण विचार योद्धाओं में हमेशा बल का संचार करते रहेंगे. हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. महेश कुमार चौधरी ने कहा कि दिनकर का साहित्य भारतीय संस्कृति, सभ्यता व परम्पराओं का आईना प्रतीत होता है.

डॉ. एस.एम.ए.एस रजी ने कहा कि दिनकर का जीवन अनुशासन व राष्ट्र गौरव का पोषण करने वाला था. सहायक प्राध्यापक. दयानंद मेहता, डॉ. अशोक कुमार एवं छात्र-छात्राओं ने अपना विचार प्रस्तुत किया. इस अवसर पर डॉ. शालिनी कुमारी भावसिंका, डॉ. दिनेश्वर राय,डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. जितेन्द्र प्रसाद समेत छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. मंच संचालन विभागाध्यक्ष एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. देवकान्त ने दिया.

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