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बिहार की प’हली महि’ला डिप्टी सीए’म बनी रेणु देवी को ननि’हाल से ही मिला संघ का संस्’कार

करीब 50 साल बाद ऐतिहा’सिक चंपारण एक बार फिर राजनी’तिक कारणों से सुर्खियों में है। यहां से 1970 में केदारनाथ पांडेय मुख्य’मंत्री बने थे। अब रेणु देवी ने बिहार की पहली महिला डिप्टी सीएम बन’कर इतिहास रचा है। 61 वर्षीय रेणु देवी की राजनी’तिक यात्रा दुर्गा वाहिनी कार्यकत्री के रूप में शुरू हुई थी। पांच बार बेतिया से वि’धायक रेणु देवी ने शादी के छह साल में ही पति को खोने के बाद अपनी मेहनत से पिछले दो दशक में सफ’लता का परचम लह’राया है।

 

रेणु देवी के भतीजे राहुल के अनु’सार हर सफल’ता की कहानी परियों की कहानी की तरह लगती है। लेकिन मेरी बुआ के लिए यह यात्रा इतनी आसान नहीं थी। बुआ ने खुद को बारिश में भींगने दिया। गर्मियों में पसी’ना बहाया और जनता के लिए ठंड को भी मात दी है। हालां’कि उनकी मेहनत के आगे यह सब बहुत कम भी है।

 

रेणु देवी के बेटे संतोष अपनी मां की तुल’ना किसी फाइटर से करते हैं। संतोष के अनु’सार बहुत कम लोग जानते हैं कि मां ने कितना दर्द सहा और तकली’फें झेली हैं। मैं मुश्किल से छह महीने का था जब पिता का निधन हो गया। लेकिन मां ने एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हुए कड़ी मेहनत की। इस दौ’रान उन्हें लंबी यात्राएं करनी पड़ीं। पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जाना पड़ा। मेरे नाना और नानी ही हमारे लिए मदद के एक मात्र सहारा थे। राजनी’तिक कैरियर में भी पिछले 40 सालों में आए तमाम झं’झावतों को उन्होंने देखा है।

 

बिहार की पहली डिप्टी सीएम बनी रेणु देवी ने अपनी सफलता के लिए बेतिया की जन’ता को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि 1973 में शादी के छह साल बाद 1979 में पति दुर्गा प्रसाद के निधन ने उन्हें बड़ा झट’का दिया था। ऐसा लगा जैसे सब’कुछ खत्म हो गया है। लेकिन परिवार और जनता के सहयोग के साथ भा’जपा से मिले प्यार व सम्मान ने साहस, दृढ़ विश्वा’स और दृढ़ निश्चय को बल दिया। इसी ने आगे के लिए राह आसान की।

 

नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम बनने की बात पर गहरी सांस लेते हुए रेणु देवी ने कहा कि यह बड़ी जिम्’मेदारी है। उन्होंने भाजपा का आभार जताया। रेणु देवी अति पिछड़ा वर्ग की नोनिया जाति से आती हैं। एक नवं’बर 1959 को जन्मीं और रेणु दीदी के नाम से मशहूर बिहार की नई डिप्टी सीएम बेतिया से पांच बार विधायक रहने से पहले मुजफ्फ’रपुर के एमडीडीएम कालेज की छात्रा रहीं। हालांकि वह स्ना’तक अंतिम वर्ष की परीक्षा नहीं दे सकी थीं। रेणु देवी हिन्दी, अंग्रेजी और बंगाली भी जानती हैं।

 

महिलाओं के अधि’कारों के लिए स्वयं सहायता समूह के साथ रेणु देवी ने 1981 में अपनी राजनी’तिक यात्रा की शुरुआत की। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से प्रभा’वित हुई। रेणु देवी के अनुसार 1935 से 1972 तक मुजफ्’फरपुर स्थित उनके ननिहाल के घर पर ही आरएसएस कार्यालय था। इसके कारण वह भी संघ परिवार की सक्रिय सद’स्य थीं। यहीं से उन्हें संघ का संस्कार भी मिला।

 

रेणु देवी को 1988 में भाजपा की दुर्गा वाहिनी का पश्चिम चंपा’रण का समन्वयक बनाया गया। राम मंदिर आंदो’लन के दौरान 500 महिलाओं के साथ गिरफ्तारी के बाद वह चर्चा में आईं। 1989 में पश्चिम चंपा’रण महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनने के बाद 1991 में उन्हें भा’जपा ने प्रदेश महिला मोर्चा की महाम’न्त्री बनाया। पहली बार रेणु देवी ने 1995 में नौतन विधानसभा सीट से भाज’पा प्रत्या’शी के रूप में चुनाव लड़ा। लेकिन 2000 के विधा’नसभा चुनावों में बेतिया सीट से पहली बार चुना’व जीता। इसके बाद फरवरी 2005, अक्तूबर 2005 और 2010 के चुनावों में लगा’तार चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। वह 2015 के चुना’वों में कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी से हार गईं। वह 2014 में भाजपा की राष्ट्रीय उपा’ध्यक्ष भी बनीं।

 

इस बीच, रेणु देवी के डिप्टी सीएम बनने से उनकी जाति नोनिया में खुशी की लहर है। बेति’या के बाहरी इलाके पिपरा के निवासी शिव बालक महतो के अनुसार उनकी सफ’लता हमारे लिए गर्व की बात है। एक बार फिर साबित हो गया कि कठिन मेह’नत ही सबसे बड़ा गुण है। जल्द यै देरी से इसका लाभ जरूर होता है। रेणु देवी के डिप्टी सीएम बनने से यह भी प्रमा’णित हुआ है कि भाजपा में ही कार्य’कर्ताओं का सम्मान होता है।

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