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Chhath Puja 2022: कोई 20 तो कोई 40 वर्षों से कर रहा छठ, जानें किन्नरों की क्यों हैं महापर्व में आस्था

गोपालगंज: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की 36 घंटे का निर्जला व्रत आज से शुरू हो गया है. छठ हमारे सामाजिक समरसता का महापर्व है. मां गंगा का जल सभी को एक कर देता है. समाज के सारे भेद-भाव मिटा देता है. बिहार के गोपालगंज में किन्नर समुदाय हर साल की तरह इस साल भी काफी धूमधाम और आस्था के साथ छठ पूजा का त्योहार मना रहे है.

 गोपालगंज के किन्नरों ने की छठ पूजा (News18)

बता दें कि किन्नर समुदाय लोगों की पूजा पाठ देखने गांव-शहर से कई लोग पहुंचते है. गोपालगंज के कई इलाकों में ऐसी ही मिसाल पेश कर रहे हैं ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय के लोग है. इनकी आस्था किसी से भी कम नहीं है. इस दौरान करीब एक सप्ताह तक समुदाय के लोग छठी मइया की भक्ति में लीन हैं और क्षेत्र छठ गीतों से गुंजायमान है.

गोपालगंज के भठवा गांव में रहने वाले किन्नर भी काफी आस्था के साथ छठ पूजा कर रहे है. छठ के गीत गाकर पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जा रही है. ट्रांसजेंडर समुदाय के सुमन सिंह किन्नर ने बताया कि पिछले करीब 40 वर्षों से काफी आस्था व श्रद्धा के साथ छठी मइया की पूजा की जा रही है. उनके अनुसार वे हर साल इस महान पर्व के माध्यम से समाज में सुख-शांति की मंगलकामना करती है.

सुमन ने कहा कि भगवान ने उन्हें इस जन्म में उचित स्वरुप ना दिया, लेकिन छठ पर्व के दौरान वे लोगों की खुशहाली के साथ-साथ अपने और समुदाय के बाकी सदस्यों को अगले जन्म में उचित स्वरुप देने की कामना करती है. उनके साथ नेहा किन्नर 20 वर्ष से, लाडली किन्नर 10 वर्ष से और सुहानी किन्नर 5 वर्ष से छठ की पूजा करती आ रहीं है.  छठ पूजा को लेकर गेहूं सुखाने व खरना के लिए कई प्रकार के व्यंजन बनाये जा रहे है. साथ ही कोशी भरने के लिए तैयारी की जा रही है.

किन्नरों ने बताया कि छठी मइया हमारी सभी मनोकामना पूर्ण करती है. इसको लेकर आस्था व विश्वास के साथ प्रत्येक वर्ष पूजा की जाती है. पूजा समाप्त होने के बाद अन्य व्रतियों व लोगों में प्रसाद का वितरण किया जाता है. किन्नर समुदाय का पूजा-पाठ देखने के लिए लोग भी पहुंचते हैं. आसपास के लोग भी उन्हें  सहयोग करते है. किन्नर छठ व्रती कुचायकोट के भठवा रूप गांव में छठ घाट पर डूबते व उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे.

 

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