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बिहार-झारखंड के सीमावर्ती इलाके में ड्रोन की मदद से श’राब की बड़ी खे’प ज’ब्त

बिहार में आए-दिन शरा’ब की खे’प ज’ब्त हो रही हैं, धं’धेबाजों पर कड़ी नज़र होने के बावजूद तस्क’र श’राब की त’स्करी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। फतेहपुर थाने की पुलिस ने बिहार-झारखंड के सीमावर्ती इलाके में ड्रोन की मदद से शरा’ब कारोबा’रियों के खि’लाफ अभियान चलाया। अभियान का नेतृत्व वजीरगंज कैंप डीएसपी घूरन मंडल ने किया। झारखंड के चौपारण थाना क्षेत्र के बोकाड जंगल में ड्रोन की मदद से श’राब बनाने वाले स्थल की पहचान की गयी। जंगल में चट्टान के ऊपर श’राब तस्क’रों के द्वारा कई श’राब भ’ट्ठी का निर्माण कर बड़े पैमाने पर श’राब का निर्माण किया जा रहा है।

अलवर मे शौच करने गई एक युवती को उठा ले गया बघेरा, ड्रोन की मदद से जंगल में  सर्च ऑपरेशन जारी।

मिली जानकारी के अनुसार, मौके पर पहुंची पुलिस ने 17000 किलो जावा महुआ फूल व 300 लीटर दे’सी श’राब को पुलिस ने न’ष्ट कर दिया। वहीं बुधवार को फतेहपुर पुलिस ने बहेरा गांव के बधार से आठ सौ लीटर देशी महुआ शरा’ब के साथ दो बाइक को पुलिस ने ज’ब्त किया। ख़बरों के मुताबिक, पुलिस ने गुरुआ के नौडीहा में 10 लीटर श’राब के साथ एक महिला को प’कड़ा। टिकारी में न’शे में हंगा’मा करते एक को प’कड़ा गया, वहीं ऑटो से 50 लीटर श’राब के साथ दो ध’राये। वहीं, हटिया-पूर्णिया एक्सप्रेस ट्रेन से तीन बोतल श’राब ज’ब्त की गयी। खिजरसराय के जोलबिगहा गांव में छा’पेमारी कर नौ लीटर शरा’ब बरा’मद कर महिला को पक’ड़ा गया। शेरघाटी की सोने खाप कॉलोनी के पास से 10 लीटर महु’आ और श’राब के साथ झारखंड के धं’धेबाज को गिर’फ्तार किया गया। गया के मगध मेडिकल थाने की पुलिस ने धरमपुर गांव के पास से 10 लीटर श’राब के साथ एक महिला को गि’रफ्तार किया। शरा’बबंदी के पहले शरा’ब से कई जिंदगी बर्बा’द होती थी। परंतु जबसे शरा’बबंदी हुई है, इसमें काफी गिरावट आयी है।  घ’रेलू हिं’सा में भी काफी कमी आयी है। डीएम ने कहा कि पूरे बिहार में शरा’बबंदी से पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अत्यधिक खुश हैं। शरा’ब के कारोबार में जुड़े हुए व्यक्तियों को चिह्नित कर उन्हें रोजगार मु’हैया कराते हुए उन्हें स्वावलंबी बनाया जा रहा है। इस दौरान राजस्थान की टीम को नीरा उत्पादन से संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाया गया हैं। डीएम ने बताया कि गया जिला में नी’रा का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन किया जा रहा है। गया जिला में ताड़ का पेड़ सबसे अधिक संख्या में है। उन्होंने बताया कि जीविका के माध्यम से पासी समुदाय तथा अन्य लोगों को नीरा उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। इच्छुक परिवारों को लगातार ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इस दौरान राजस्थान की टीम को नीरा से बना पेड़ा चखाया गया व नीरा रस को पिलाया गया। टीम ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे पहली बार नीरा पी रहे हैं। 

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