डा राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के लैब में औषधीय मशरूम के विभिन्न प्रभेदों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं. डा राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित एडवांस सेंटर ऑफ मशरूम रिसर्च के लैब में औषधीय मशरूम के विभिन्न प्रभेदों के बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं.

इसमें मुख्यरूप से शिटाके, इनोकी व किग ओयस्टर मशरूम (औषधीय मशरूम) की खेती नवम्बर से फरवरी तक करना लाभकारी होता है. उत्पादन तकनीक एवं बीज के लिए विभाग के संबंधित वैज्ञानिकों एवं मशरूम विशेषज्ञ से प्राप्त कर सकते हैं. औषधीय मशरूम शिटाके, इनोकी और किग ओयस्टर की खेती बिहार के विभिन्न जिलों में होना संभव हो गया है.

अधिक से अधिक मात्रा में उत्पादन कर किसान ज्यादा से ज्यादा आमदनी प्राप्त कर सकते हैं. औषधीय मशरूम की खेती झोपड़ी में बड़े ही सहजता के साथ हो जाता है. जबकि मशरूम के अन्य प्रभेदों की खेती के लिए तापमान नियंत्रित कक्ष का होना अनिवार्य है. केंद्र प्रभारी डॉ आरपी प्रसाद का कहना है कि सामान्य रूप से अब मशरूम बिहार के सभी जिलों में उत्पादन हो रहा है. इस पर अब देश के अन्य प्रदेशों में भी उत्पादन की शुरुआत हो चुकी है.
























Be First to Comment