पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते कोरोना के अलावा कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियोंमें रहीं.
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस हमले के लिए भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है.
सोमवार (29 जून) को पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में स्टॉक एक्सचेंज की इमारत में चार बंदूक़धारियों ने हमला कर दियाथा.
सुरक्षाकर्मियों ने हमले को तो नाकाम कर दिया लेकिन इसमें चार बंदूक़धारी समेत दो सुरक्षा गार्ड और एक पुलिस सब–इंस्पेक्टर मारेगए थे.
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सक्रिय चरमपंथी गुट बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है.
अख़बार जंग के अनुसार हमले के अगले दिन पाकिस्तानी संसद में बोलते हुए इमरान ख़ान ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं कि येहमला भारत ने कराया है. पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए इसकी साज़िश वहीं रची गई थी.
अख़बार जंग में छपी एक ख़बर में कहा गया है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) का भारत से रिश्ता है, इसकी जानकारीसभी को है.
अख़बार के अनुसार सीपेक (चीन–पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर) के उद्घाटन के बाद से भारत बलूचिस्तान में ज़्यादा सक्रिय हो गया हैऔर वो बीएलए की मदद से पाकिस्तान में चरमपंथी कार्रवाईयों को अंज़ाम देता है.
अख़बार के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद इस बात का भांडा फोड़ा था और पाकिस्तान के इन आरोपों की पुष्टि करदी थी कि भारत बलूचिस्तान में चरमपंथी संगठनो की मदद कर रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के लाल क़िले से दिए गए अपने भाषण में बलूचिस्तान का ज़िक्र कियाथा. दूरदर्शन ने उसी साल (2016) में 27 अगस्त को बलोच नेता ब्राह्मदाग ख़ान बुगटी का एक इंटरव्यू भी चलाया था. इसके लिएदूरदर्शन की एक टीम जिनेवा भेजी गई थी.
पाकिस्तान इन्हीं सब बातों के आधार पर आरोप लगाता है कि मोदी के भाषण से साफ़ है कि भारत बलूचिस्तान में चरमपंथियों कीमदद करता है. हालांकि भारत इन आरोपों को ख़ारिज करता है.
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