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इशारों-इशारों में बहुत कुछ बोल गए राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह

राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा है कि मुद्दा व्यक्ति से बड़ा होता है। इसलिए व्यक्ति की नहीं मुद्दों पर बात होनी चाहिए। सब लोग व्यक्ति पर बात कर रहे हैं और इसमें मुद्दा गौण हो गया। उनका इशारा मंडी कानून सामप्त होने के बाद किसानों की बदाहाली की ओर था। लालू और तेजस्वी का नाम लिए बगैर जगदानंद सिंह ने कहा कि गरीबी व भूख के मामले में बिहार की स्थिति सबसे खराब है। इसको मुद्दा बनाये जाने के बजाए फिजूल की बातों पर चर्चा हो रही है।

इशारों-इशारों में बहुत कुछ बोल गए राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह

रामगढ़ के सहुका स्थिति उनके पैतृक निवास पर गुरुवार की सुबह से ही राजद के साथ साथ महागठबंधन के घटक दलों के कार्यकर्ताओं की भीड़ देर शाम तक जमी रही। रोहतास, बक्सर व भोजपुर के कार्यकर्ता भी मिलने के लिए आए थे। सभी लोग उनसे 2025 तक प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहने का अनुरोध कर रहे थे। प्रदेश अध्यक्ष सभी कार्यकर्ताओं को संगठन की मजबूती के लिए काम करने का निर्देश दे रहे थे।

बता दें कि जगदानंद सिंह अपने बेटे सुधाकर सिंह के इस्तीफे के बाद से पार्टी के कामकाज से अलग हो गये हैं। वे पटना स्थित राजद के प्रदेश कार्यालय में नहीं जा रहे हैं। दिल्ली में राजद के राष्ट्रीय सम्मेलन में भी जगदानंद सिंह नहीं पहुंचे। इसके बाद ये खबर उड़ी कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

जगदानंद सिंह कार्यकर्ताओं के बीच बोल रहे थे कि वे अलग कहां हैं। यहां बैठकर भी तो सबकी समस्याओं को सुलझा रहा हूं। राजद की मजबूती के लिए सभी लोंगों को अपने-अपने क्षेत्र में बुनियादी समस्याओं के निराकरण के लिए लगे रहना चाहिए। कृषि पर उनका फोकस सबसे अधिक था। उन्होंने कहा कि धरती हमारी किताब है और समस्याएं इनके अक्षर हैं। इसको पढ़कर ही हमलोग समाजवाद सीखे हैं। किताब के पन्नों को पढ़कर समाजवाद नहीं सीखा जा सकता। हमनें खेतों में फावड़े चलाकर जमीनी समस्याओं को समझा और आधारभूत संरचनाएं विकसित की। जिसका नतीजा है कि कम बारिश के बावजूद बिजली की व्यवस्था से धान की फसल लहलहा रही है। सभी लोगों को अपने-अपने इलाके में इस तरह से कार्य करना होगा।

बीज से लेकर बाजार तक करनी होगी व्यवस्था
जगदानंद सिंह ने कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की व्यवस्था जब तक नहीं होगी, तब तक किसानों को राहत नहीं मिलेगी। इस समय व्यक्ति पर चर्चा ज्यादा हो रही है जबकि जरूरत मुद्दों पर चर्चा करने की है। जबसे मंडी व्यवस्था समाप्त हुई तब से किसानों को उनके उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। केन्द्र सरकार जो कृषि बिल लायी है उसमें किसानों से अधिक अडानी व अंबानी की चिंता थी। सुदूरवर्ती इलाके में भी गोदाम बनाकर उनको लाभ पहुंचाने की कोशिश की गयी है।

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