गया शहर के आजाद पार्क में पर्वत पुरूष दशरथ मांझी की 14वीं पुण्यतिथि पर मनायी गयी। कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री व हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी शामिल हुए।

पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस तरह से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है या कोई भी देश किसी दूसरे देश पर आक्रमण करें तो यह अच्छा नहीं है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री से दशरथ मांझी को भारत रत्न देने की भी मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां के राष्ट्रपति भारत आए हैं, तो उन्होंने कहा है कि अगर हम वहां रहते तो काफी खून-खराबा होता। इसलिए हम यहां आए हैं, चुकि वे शांतिप्रिय इंसान हैं। किसी देश की भूमि पर कब्जा करना भारतीय राष्ट्रीय नीति के खिलाफ है। वही उन्होंने कहा कि भारत में आतंकी गतिविधियों में चीन भी सम्मिलित है। पाकिस्तान बाहरी शक्तियों का इस्तेमाल कर रहा है।

गौरतलब है कि शहर के आजाद पार्क में श्री दशरथ मांझी विचार मंच के तत्वाधान में पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी की 14वीं महापरिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि रैली निकाली गई। इस मौके पर बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी, वजीरगंज विधायक वीरेन्द्र सिंह, अध्यक्ष नंदलाल मांझी, संतोष मांझी, लक्ष्मण मांझी, सरवन मांझी, दीना नाथ मांझी सहित मांझी विचार मंच के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे।

पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी की 14वीं पुण्यतिथि पर सब प्रथम पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बाबा दशरथ मांझी के चित्र पर माल्यार्पण किया और श्रद्धांजलि रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शहर के आजाद पार्क से गाजे-बाजे के साथ रैली निकाली गई। जो खिजरसराय होते हुए गेहलौर घाटी पवित्र समाधि स्थल तक पहुंची।

वही पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि सौभाग्य की बात है कि बाबा दशरथ मांझी जिस समाज से आते हैं अगर उस समाज में किसी का पुण्यतिथि मनाया जाता हैं तो दोनों गौरवान्वित होते हैं। दशरथ मांझी समाज के निचले पैगाम पर रहते हुए इतना बड़ा काम किया जो कभी भुलाया नहीं जा सकता है। भूखे, प्यासे रहकर 22 वर्ष 6 महीना में गेहलौर पहाड़ को काटकर चलने लायक एक रास्ता बना दिया।

जीतन राम मांझी ने कहा कि हमारे बेटे मंत्री संतोष कुमार सुमन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर दशरथ मांझी को भारत रत्न का उपाधि देने की मांग किया है और हम आज उनके पुण्यतिथि पर संकल्प लेते हैं कि जब तक बाबा दशरथ मांझी को भारत रत्न का उपाधि नहीं दिया जाता है, तब तक हम लोग चैन से बैठने वाले नहीं है। जब हम मुख्यमंत्री थे तो हमने ही बाबा दशरथ के नाम पर महोत्सव मनाने की शुरुआत की थी। जिसके बाद दशरथ महोत्सव मनाया जाता है।














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