भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के क्रियान्वयन में अनियमितताओं को रेखांकित किया है। रिपोर्ट में नाबालिगों को पक्के मकान स्वीकृत करने से लेकर दिल्ली और झारखंड में स्थित घरों की जियो-टैगिंग किए जाने जैसे मामलों का उल्लेख है।

यह रिपोर्ट राज्य विधानसभा में पेश की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है, ”नमूना जिलों के अभिलेखों की जांच के दौरान लेखा परीक्षा में अपात्र लाभार्थियों को आवास स्वीकृत करने के मामले सामने आए। पीएमएवाई-जी में नाबालिगों के नाम पर आवास पंजीकरण/स्वीकृति का कोई प्रावधान नहीं है।”



इसमें कहा गया, ”केंद्र सरकार ने सितंबर 2017 में स्पष्ट किया था कि यदि पति-पत्नी दोनों की मृत्यु हो गई हो तो सूची में प्रदर्शित नाबालिग बच्चे के नाम पर अभिभावक या प्रखंड/पंचायत अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से सत्यापन के बाद आवास स्वीकृत किया जा सकता है। हालांकि, लेखा परीक्षा में नाबालिग लाभार्थियों के चार मामले पाए गए।”












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