भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार तथा यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में बोधगया स्थित सम्बोधि रिट्रीट में ‘जर्नी ऑफ एंटीनैटल, नेटल एंड नियोनेटल इंटीग्रेटेड केयर (JANANI) पोर्टल (RCH 2.0)’ पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय समीक्षा-सह-उन्मुखीकरण कार्यशाला का सफल समापन हुआ।


जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल नवाचार के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बिहार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और सेवा वितरण को और सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया

यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से विकसित JANANI पोर्टल का उद्देश्य प्रजनन, मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A) सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। यह प्लेटफॉर्म लाभार्थियों की समग्र डिजिटल ट्रैकिंग, क्यूआर-कोड आधारित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान के लिए स्वचालित अलर्ट, समयबद्ध सेवाओं हेतु ड्यू-लिस्ट जनरेशन तथा रियल-टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड जैसी सुविधाओं से लैस है।

इससे राज्य में माताओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सेवा प्रदायगी की गुणवत्ता तथा स्वास्थ्य परिणामों में और सुधार होने की उम्मीद है। इस दौरान कार्यशाला में बिहार के सभी जिलों से आए जिला स्वास्थ्य पदाधिकारी, कार्यक्रम प्रबंधक, स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) से जुड़े अधिकारी एवं कर्मी तथा विकास संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दो दिवसीय इस कार्यशाला का उद्देश्य JANANI पोर्टल की प्रगति की समीक्षा करना तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की क्षमता को सुदृढ़ बनाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ अरविंद कुमार, सिस्टम एनालिस्ट-सह-डेटा पदाधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार सरकार के स्वागत वक्तव्य से हुआ। उन्होंने कहा कि JANANI पोर्टल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और लाभार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है तथा इसकी सफल क्रियान्वयन में सभी जिलों की सक्रिय भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
यूनिसेफ बिहार प्रमुख मोनिका नीलसन ने कहा कि JANANI कागजी व्यवस्था से एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जो गर्भावस्था से लेकर प्रसव और शिशु देखभाल तक प्रत्येक मां और बच्चे की निरंतर ट्रैकिंग सुनिश्चित करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली रियल-टाइम मॉनिटरिंग को सशक्त बनाएगी, डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को बेहतर करेगी तथा जरूरतमंद और संवेदनशील लाभार्थियों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मददगार साबित होगी। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के विकास के लिए बिहार सरकार को यूनिसेफ के निरंतर तकनीकी सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि JANANI पोर्टल राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है। उन्होंने कहा कि रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डिजिटल लाभार्थी ट्रैकिंग और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन के माध्यम से यह प्रणाली गर्भवती महिलाओं और बच्चों को समय पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को और बेहतर बनाएगी।
दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला के दौरान भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा यूनिसेफ के विशेषज्ञों द्वारा कई महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को JANANI पोर्टल की विभिन्न प्रमुख सुविधाओं और मॉड्यूल्स की विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें राष्ट्रीय लाभार्थी खोज (नेशनल बेनेफिशियरी सर्च), पूर्ववर्ती RCH प्लेटफॉर्म से डेटा माइग्रेशन, नए लाभार्थियों का पंजीकरण, फेस ऑथेंटिकेशन, प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) सेवाएं, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं निगरानी, विशेष जांच, अल्ट्रासाउंड मॉनिटरिंग, प्रसव की तैयारी, प्रसव परिणामों का रिकॉर्ड तथा नवजात शिशुओं के पंजीकरण से संबंधित विषय शामिल थे।
कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) के अंतर्गत डेटा की गुणवत्ता में सुधार, स्वास्थ्य संस्थानों की आधारभूत संरचना एवं मानव संसाधन संबंधी रिपोर्टिंग को सुदृढ़ बनाने तथा रियल-टाइम स्वास्थ्य आंकड़ों के आधार पर साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने गुणवत्तापूर्ण डेटा को प्रभावी स्वास्थ्य प्रबंधन और बेहतर सेवा वितरण की आधारशिला बताते हुए प्रतिभागियों को डेटा की समयबद्ध एवं सटीक प्रविष्टि सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
कार्यशाला के दौरान आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA), हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR), हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR), पोषण ट्रैकर तथा यू-विन (U-WIN) जैसी राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के साथ JANANI पोर्टल के एकीकरण पर भी विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। इसके अलावा मोबाइल अकादमी, किलकारी एवं मदर-चाइल्ड ट्रैकिंग एंड फैसिलिटेशन सेंटर (MCTFC) से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में पटना, रोहतास सहित विभिन्न जिलों की टीमों ने JANANI पोर्टल के क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव, उपलब्धियां, चुनौतियां और नवाचारों को साझा किया। इस दौरान प्रतिभागियों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसेज) का आदान-प्रदान हुआ, जिससे जिलों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए नई रणनीतियां अपनाने का अवसर मिला।
कार्यशाला में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, यूनिसेफ तथा राज्य के विभिन्न जिलों के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।










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