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शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के सभी खातों पर लगाई रोक, पूर्णिया यूनिवर्सिटी के वीसी से मांगा स्पष्टीकरण

पटना: बिहार सरकार के शिक्षा विभाग और राजभवन के बीच चल रही अधिकारों को लेकर खींचातानी समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। अब दोनों के बीच चल रहे विवाद की आंच विश्वविद्यालय तक पहुंच गई है। स्थिति यह हो गई है कि विश्वविद्यालय अधिनियम और परि-नियम का हवाला देकर कुलपति को पदच्युत करने की चेतावनी दी जा रही है।

 

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मामला 16 मई को शिक्षा विभाग के द्वारा बुलाई गयी बैठक में पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजनाथ यादव का नहीं शामिल होने से जुड़ा है। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के शिक्षा सचिव ने बैठक में उपस्थित नहीं होने पर पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति से स्पष्टीकरण की मांग की है। साथ ही अति महत्वपूर्ण कार्य के निष्पादन में उदासीनता बरतने का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत कुलपति को पदच्युत करने की चेतावनी दी है। हालांकि पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा स्पष्टीकरण भेजे जाने के बाद उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग के पत्र को निरस्त कर 15 दिनों के अंदर विश्वविद्यालय को बजट की राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

 

शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के सभी खातों पर लगाई रोक शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव ने पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजनाथ यादव को पत्र निर्गत कर स्पष्टीकरण की मांग की है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभागीय पत्रांक-1866 दिनांक-10 मई द्वारा विभाग के स्तर पर विश्वविद्यालयों के बजट वर्ष 2024-25 की समीक्षा हेतु एक बैठक रखी गई थी। इस बैठक में आपके साथ समीक्षा हेतु अन्य संबंधित पदाधिकारी यथा वित्तीय परामर्शी, कुलसचिव एवं वित्त पदाधिकारी के साथ-साथ यथा आवश्यक बजट बनाने से संबधित अन्य पदाधिकारियों एवं कर्मियों को भाग लेने कहा गया था। आपके विश्वविद्यालय से संबंधित बैठक 16 मई को आयोजित थी। परन्तु आप बैठक में नहीं आये।

 

पत्र में कहा गया है कि यदि बैठक के दिन आप अन्यथा व्यस्त थे तो आपने विभाग में इसकी सूचना ससमय दे देनी चाहिए थी, ताकि विभाग उक्त बैठक के लिए आपकी सुविधानुसार तिथि रख सकता था। इसके कारण विभागीय पदाधिकारियों एवं आपके विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों का भी समय व्यर्थ हुआ। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी, क्योंकि आप अनुपस्थित थे। आप जानते होंगे कि बजट संबंधी मामला अति गंभीर होता है। इसमें कुलपति का स्वयं रहना अत्यंत आवश्यक होता है।

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