पटना: लोकसभा चुनाव 2024 के बीच विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) सुप्रीमो मुकेश सहनी की ‘वाई प्लस’ सुरक्षा हटा दी गई है। वीआईपी ने दावा किया है कि सहनी की सुरक्षा में तैनात वाई प्लस सिक्योरिटी वाले जवान अब उनके साथ नहीं हैं। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक पारा गर्मा गया है। मुकेश सहनी की पार्टी ने बीजेपी पर तानाशाही का आरोप लगाया है। वीआईपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस के लोग एक गरीब मल्लाह के बेटे से डर गए हैं। बता दें कि हाल ही में मुकेश सहनी ने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर हमला बोला, जिस पर बीजेपी ने आपत्ति दर्ज की थी।
वीआईपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने मुकेश सहनी की सुरक्षा में तैनात ‘वाई प्लस’ श्रेणी के सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया है। हालांकि, इस संबंध में सहनी या पार्टी को कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है। देव ज्योति ने एनडीए सराकर पर हमला बोलते हुए कहा कि हमारी वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा छीनकर लेंगे। हमारी सुरक्षा बिहार की गरीब जनता करती है।
उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की तानाशाही से मुकेश सहनी और निषाद समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता है। हम कल भी गरीबों के सम्मान के लिए उनके सियासी अधिकार के लिए लड़े थे और लगातार लड़ते रहेंगे। बीजेपी और आरएसएस को गरीब मल्लाह के बेटे से डर लगता है। जब तक जिस्म में जान है गरीबों को सियासी सम्मान और उनके अधिकारों के लिए हम लोग खून का एक-एक कतरा बहा देंगे।
बता दें, कि मुकेश सहनी को केंद्र सरकार ने पिछले साल वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी थी। उस समय वे किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं थे। लोकसभा चुनाव से पहले उनके एनडीए में जाने के कयास लगाए जा रहे थे, मगर बीजेपी से बात नहीं बनी और उन्होंने आरजेडी के साथ महागठबंधन में शामिल होने का फैसला लिया। आरजेडी ने लोकसभा चुनाव 2024 में सहनी की पार्टी को तीन सीटें दी हैं। तेजस्वी यादव के साथ वे धुआंधार रैलियां करके बीजेपी एवं मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं।
मुकेश सहनी ने केंद्रीय गृह मंत्री के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें अमित शाह ने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को दबाने का आरोप विपक्ष पर लगाया। सहनी ने पीएम नरेंद्र मोदी और शाह पर हमला बोलते हुए कहा कि वे 10 साल से ताली बजा रहे थे क्या। उन्होंने मंडल कमीशन की रिपोर्ट क्यों लागू नहीं की। सहनी के पलटवार के कुछ घंटों बाद ही उनकी वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा हटा दी गई, जिससे सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।


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