मुजफ्फरपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मुजफ्फरपुर और समया शिक्षण एवं विकास संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में नालसा के निर्देश पर एएसएचए-एसओपी पर हितधारकों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया.

इसका उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती श्वेता कुमारी सिंह, परिवार न्यायालय के न्यायाधीश पीयूष प्रभाकर, जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव जयश्री कुमारी, सिविल सर्जन डॉ अजय कुमार और कवच परियोजना के राज्य प्रतिनिधि अभिजीत डे एवं अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी एवं पश्चिमी तथा बाल संरक्षण पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.



बेटियां तभी सुरक्षित जब विवाह न हो सामाजिक अभिशाप उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती श्वेता कुमारी सिंह ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप ही नहीं, कानूनी अपराध भी है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बेटियां तभी सुरक्षित रहेंगी जब विवाह एक सामाजिक अभिशाप नहीं होगा.



उन्होंने सभी हितधारकों से बाल विवाह मुक्त समाज बनाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी प्रयास को आवश्यक बताया. उन्होंने आगे कहा कि सभी हितधारकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पंचायत में नियमित बाल सभा और बाल कल्याण संरक्षण समिति की बैठक हो तथा मीना मंच और बाल संसद का बाल संरक्षण के मुद्दे पर नियमित प्रशिक्षण हो.


राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आंकड़े दुखद वहीं परिवार न्यायालय के न्यायाधीश पीयूष प्रभाकर ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आंकड़ों को दुखद बताया. उन्होंने कहा कि अगर महिला एवं पुरुषों के अनुपात में एक पक्ष भी कमजोर होता है, तो परिवार और समाज में दुष्प्रभाव पड़ता है. बाल विवाह को पूर्ण रूप से रोकने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर प्रयास करना जरूरी है.






















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